आर्यन साहनी देश का सबसे बड़ा सुपरस्टार है, पर एक सुबह उसके मेकअप रूम के शीशे पर ख़ून से लिखी धमकी उसका सारा रुतबा हिला देती है: 'तेरा वक़्त आ गया.' एजेंसी अपनी सबसे क़ाबिल क्लोज़-प्रोटेक्शन ऑफ़िसर को भेजती है, कैप्टन सुहाना बेदी, फ़ौज की तपी हुई और चट्टान जैसी अटल. पर जब वो दरवाज़े से अंदर आती है, आर्यन की साँस रुक जाती है, क्योंकि नौ साल पहले यही वो लड़की थी जिससे उसने बेपनाह मोहब्बत की थी, और शोहरत की पहली आहट पर जिसे वो बिना एक लफ़्ज़ कहे छोड़ गया था. अब वो उसकी परछाई है, चौबीसों घंटे साथ, और उसे उसी शख़्स की जान बचानी है जिसने उसे तोड़ा था. धमकी देने वाला घर के भीतर है, वो बातें जानता है जो सिर्फ़ अपने जान सकते हैं, और वो नौ साल पुराने एक ऐसे राज़ की तरफ़ इशारा करता है जिसे आर्यन ने राख के नीचे दफ़ना रखा है. फ़िल्मी दुनिया की चकाचौंध, हर चेहरे पर शक, और एक बॉडीगार्ड जो अपने फ़र्ज़ और अपने ज़ख़्म के बीच फँसी है. जिसे उसे साये की तरह बचाना है, वही उसका सबसे गहरा ज़ख़्म है.
विषय-सूची
-
देश के सबसे बड़े सुपरस्टार आर्यन साहनी के बंद वैनिटी रूम के शीशे पर एक सुबह खून से लिखी धमकी उभरती है, 'तेरा वक़्त आ गया, आर्यन।' मैनेजर मिहिर इसे प्रेस से पहले दबा देना चाहता है, इसलिए एजेंसी अपनी सबसे क़ाबिल क्लोज़-प्रोटेक्शन ऑफ़िसर भेजती है, और दरवाज़े से जो औरत अंदर आती है वो कैप्टन सुहाना बेदी है, वही लड़की जिससे नौ साल पहले आर्यन ने बेपनाह मोहब्बत की थी और शोहरत की पहली आहट पर बिना एक लफ़्ज़ कहे छोड़ गया था। दोनों एक-दूसरे को पहचानते हैं और चुप रह जाते हैं, पर जब सुहाना शीशे की उन लाइनों को पढ़ती है तो उसका खून जम जाता है।
-
सुहाना आर्यन के समंदर किनारे वाले बंगले में क़दम रखते ही कमान अपने हाथ में ले लेती है और एक ऐसा सख़्त सुरक्षा-नियम लागू कर देती है जो लाड़ला सितारा बर्दाश्त नहीं कर पाता। उसका बड़े दिल वाला फ़ौजी नंबर-दो जग्गी पूरे घर की तलाशी लेता है और नौकरों से गपशप में सुराग़ बटोरता है, जबकि आर्यन बार-बार 'हम दोनों' की बात छेड़ता है और सुहाना हर बार उसे ठंडेपन से काट देती है। रात होते-होते वो घर को पूरी तरह सील मान लेती है, पर उसे उसी के बनाए घेरे के भीतर एक दूसरा पैग़ाम मिलता है, जो सीधे उसके नाम है।
-
अपनी जेब में मिले पैग़ाम के बाद सुहाना पूरे घर को शक की नज़र से नापती है और एक-एक चेहरे की फ़ाइल बनाती है, जबकि आर्यन की सबसे भरोसेमंद सेक्रेटरी नैरा हर क़दम पर मददगार और अपरिहार्य बनती जाती है। सुनहरे पिंजरे की सच्चाई खुलती है, आर्यन की तन्हाई, उसके इर्द-गिर्द की चापलूसी, और रात को एक भयानक सपने में टूटता हुआ वो इंसान जिसे सुहाना पुराने तरीक़े से शांत करती है, जहाँ दबी हुई नज़दीकी एक पल को जाग कर बुझ जाती है। पर जब सुहाना स्टाफ़ के काग़ज़ात अपने सूत्रों से मिलाती है, तो पता चलता है कि आर्यन के सबसे क़रीब वाला शख़्स एक गढ़ी हुई पहचान के नीचे जी रहा है।
-
आर्यन की फ़िल्म 'आग़ाज़' की शूटिंग सुहाना की सख़्त निगरानी में दोबारा शुरू होती है और पूरा सेट शक से भर जाता है, को-स्टार रिया की जलन, हड़बड़ाया डायरेक्टर, और फ़िल्म वक़्त पर ख़त्म करने का दबाव। तभी एक ढीली की गई भारी लाइट और एक छेड़ा गया स्टंट आर्यन को कुचलने ही वाला होता है कि सुहाना उसे खींच लेती है, नौ साल बाद उनका पहला असली स्पर्श, पहली चिंगारी जो दोनों नहीं चाहते। जाँच बताती है कि तोड़फोड़ अंदर के किसी हाथ की है, और दिन ढलते-ढलते बंद सेट पर एक ऐसा आदमी चला आता है जिसे सुहाना ने कभी क्लियर नहीं किया, और आर्यन का चेहरा ऐसे सफ़ेद पड़ जाता है जैसे उसने कोई भूत देख लिया हो।
-
बूढ़ा थिएटर उस्ताद इक़बाल आर्यन के सेट पर आ कर नौ साल पुराना अतीत सुहाना और आर्यन के बीच खड़ा कर देता है, तीन दोस्तों की कहानी, नाटक 'साया', पहली फ़िल्म, और वो दोस्त आकाश जो कभी लौट कर नहीं आया। आर्यन आधी-अधूरी बात कह कर अपना हिस्सा छुपाता है, और आकाश के लिए सुहाना का दबा हुआ ग़म फिर जाग उठता है। रात को दोनों एक चुम्बन के इतने क़रीब पहुँच कर पीछे हट जाते हैं, तभी आर्यन की वैनिटी में एक ऐसा तोहफ़ा मिलता है जो सिर्फ़ अंदर का कोई रख सकता था, और जाते-जाते इक़बाल सुहाना के कान में कह देता है कि आकाश ने ख़ुदकुशी नहीं की थी, और आर्यन ये जानता है।
-
इक़बाल के इस राज़ के बाद कि आकाश की मौत क़त्ल थी और आर्यन ये जानता है, सुहाना आधी रात आर्यन को घेरती है, पर वो एक दीवार खड़ी कर देता है। अगली रात धमकी लफ़्ज़ों से निकल कर वार में बदल जाती है, बंगले में एक नक़ाबपोश घुसपैठिया आर्यन की जान लेने आता है, और सुहाना की फ़ौजी तालीम एक क़त्ल को लड़ाई में बदल देती है। हमले के बाद की हाँफती नज़दीकी में नौ साल की आग फिर सुलगती है, और सुहाना समझ जाती है कि हमलावर को आर्यन का एक-एक पल पता था, यानी वो अंदर का कोई है। वो घुसपैठिये को घेर कर नक़ाब खींचती है, और जिस पल वो अंधेरे में ग़ायब होता है, सुहाना देखती है कि वो एक औरत थी, जो अपने पीछे एक पुरानी तस्वीर छ
-
रात के हमले में गिरी पुरानी तस्वीर हमलावर को सीधे आकाश से जोड़ देती है, और इक़बाल उसे 'साया' के पहले शो की तस्वीर पहचान लेता है। सुहाना धागा खींचती है और सच खुलता है, आर्यन को सितारा बनाने वाली फ़िल्म 'परछाईं' दरअसल आकाश की चुराई हुई 'साया' थी, जिससे आकाश का नाम मिटा दिया गया। सुहाना आर्यन को घेरती है और वो चोरी और उसे छोड़ने का इक़रार तो करता है, पर मौत का सच अब भी दबा जाता है, और दोनों के बीच का ज़ख़्म पूरी तरह खुल जाता है। इक़बाल के पास रखे आकाश के सामान में सुहाना को पता चलता है कि आकाश की एक छोटी बहन थी जो नौ साल पहले हर काग़ज़ से ग़ायब हो गई, और उस लड़की की आख़िरी तस्वीर में वही आँखें है
-
आकाश की चोरी और अपने अतीत का बोझ सुहाना को तोड़ देता है, और वो उस आदमी की हिफ़ाज़त से हाथ खींचने के लिए एजेंसी को अपनी जगह बदलने की दरख़्वास्त लिख देती है। पर आर्यन इस बार क्लाइंट की तरह गिड़गिड़ाने के बजाय पहली बार पूरा सच कहता है कि वो क्यों भागा था, कि वो सुहाना की आँखों में अपना बिका हुआ, बुज़दिल चेहरा देखने से डरता था, और ये इक़रार इतना कच्चा और सच्चा है कि दोनों एक बार फिर एक-दूसरे के बेहद क़रीब पहुँच कर पीछे हटते हैं। सुहाना अपना फ़ैसला बदल कर रुक जाती है, पर एक नई सोच के साथ, वो आर्यन की बॉडीगार्ड नहीं, आकाश के इंसाफ़ की तलाश बन कर रुकती है। तभी धमकियाँ अचानक ख़ामोश पड़ जाती हैं, और सु
-
एक तूफ़ानी रात, नैरा हमेशा की तरह मददगार बन कर सुहाना को सारे रिकॉर्ड थमाती है और बड़ी नरमी से शक की सुई हटाए गए भास्कर की तरफ़ मोड़ देती है, जबकि सुनने वाले को पता है कि खेल खेलने वाली ख़ुद शिकार का पीछा कर रही है। फिर तूफ़ान में बिजली चली जाती है और लॉकडाउन सुहाना और आर्यन को एक ही पैनिक रूम में बंद कर देता है, जहाँ नौ साल की आग अब तक की सबसे ऊँची लपट तक पहुँच कर, दुनिया के दख़ल पर, फिर रोक ली जाती है, पर उनके बीच एक ख़तरनाक नरमी जाग उठती है। रात के सन्नाटे में सुहाना को एक आवाज़ सुनाई देती है, आकाश की अपनी रिकॉर्ड की हुई आवाज़, जो नाटक 'साया' की आख़िरी लाइनें पढ़ रही है, और वो आवाज़ उस कमरे
-
आकाश की आवाज़ ने पूरे घर को दहशत में डाल दिया है, और सुहाना उस ऑडियो के तार को मैनेजर मिहिर के सिस्टम-एक्सेस तक, और फिर उससे भी बुरी एक सच्चाई तक खींच लाती है, कि मिहिर बरसों से आर्यन का पैसा चुरा कर क़र्ज़ में डूबा है, एक ऐसा आदमी जिसे सितारे की मौत से फ़ायदा है। सामना बदसूरत होता है, मिहिर की पैसों की ग़द्दारी सच है, पर वो अपनी जान की क़सम खा कर कहता है कि धमकियाँ देने वाला वो नहीं। आर्यन अपने सबसे भरोसेमंद आदमी के धोखे से हिल जाता है, और ये चोट उसे और सुहाना को और क़रीब ले आती है। घिरने पर मिहिर फूट पड़ता है कि उसे नौ साल पहले उस लड़के के साथ हुई हक़ीक़त पर ख़ामोश रहने के लिए ब्लैकमेल किया
-
मिहिर के दिए पैसे के धागे को खींचते हुए सुहाना उस बेनाम आक़ा की पहली परछाईं तक पहुँचती है, प्रोड्यूसर योहान बत्रा, वही जिसने आर्यन को सितारा बनाया और नौ साल से उसका ख़ून चूस रहा है। नैरा की लाई हुई 'परछाईं' के मुहूर्त की एक पुरानी तस्वीर में सुहाना पाती है कि आकाश को फ़्रेम से, क्लैपबोर्ड से, हर याद से जान-बूझ कर काट दिया गया था, यानी वो नाकाम नहीं था, उसे मिटाया गया था। एक ही आदमी के दो शोक, दो अपराधबोध, आर्यन और सुहाना को ख़तरनाक हद तक क़रीब ले आते हैं, जबकि नैरा उसी तस्वीर पर एक पल को काँप जाती है जिसे दोनों नहीं पकड़ते। तस्वीर को बड़ा करने पर सुहाना सेट के सबसे पीछे एक किशोरी को क्लैपबोर्ड
-
सच के बेहद क़रीब पहुँच चुकी सुहाना के लिए दस दिन की ख़ामोशी के बाद धमकी देने वाला एक अल्टीमेटम छोड़ता है, आर्यन प्रीमियर की रात मंच पर 'परछाईं' की चोरी और उस रात का सच सरेआम क़ुबूल करे, वरना उसी रात मारा जाएगा। नोट आर्यन की नींद की बड़बड़ाहट, कंधे के निशान और पैनिक रूम तक की ऐसी अंदरूनी बातों से भरा है जो सिर्फ़ इस घर के भीतर का कोई जान सकता है, और सेट पर को-स्टार रिया की जलन एक सरेआम तमाशे में फूट पड़ती है। घेराबंदी आर्यन और सुहाना को उस चुम्बन की कगार तक ले आती है जिसे वो बार-बार टालते आए हैं, हर दीवार अब काग़ज़ की रह गई है। आख़िर में नोट का सबसे निचला हिस्सा खुलता है, जो आर्यन की मौत की ठीक
-
प्रीमियर की उलटी गिनती और साझा ग़म के दबाव में नौ साल पुरानी दीवार आख़िरकार टूट जाती है, और आर्यन और सुहाना का पहला असली चुम्बन, जो नौ बरस और एक पूरी त्रासदी से पक रहा था, जल कर दहलीज़ पर आ कर थम जाता है। पर उसी रात एक आहट का पीछा करते हुए सुहाना नौकर-क्वार्टर के पीछे एक छिपे कमरे तक पहुँचती है, जिसकी दीवारें आकाश की पूरी ज़िंदगी, आर्यन की नौ साल की निगरानी, और ख़ुद सुहाना की फ़ौजी फ़ाइल से ढकी हैं, यानी साया उसे भी पढ़ता आया है। तस्वीरों के बीच उसे वो सबूत मिलता है जो उसका ख़ून जमा देता है, धमकी देने वाला आकाश की छोटी बहन है, और इसी हाथ ने सुहाना की इस घर में पोस्टिंग करवाई थी, यानी वो शुरू स
-
उस छिपे कमरे से बदल कर निकली सुहाना के लिए बीती रात का चुम्बन अब आकाश की याद से ग़द्दारी और अपने फ़र्ज़ से समझौता बन चुका है, क्योंकि अब वो जानती है कि धमकी देने वाला आकाश की बहन है और उसे ख़ुद एक मोहरे की तरह इस घर तक लाया गया था। वो आर्यन से बेरहमी से पीछे हट जाती है, जिसे नौ साल बाद पहली बार जगी उम्मीद चूर-चूर हो जाती है, और सुहाना ख़ुद को दोबारा जोड़ती है, पर अब एक आशिक़ या पहरेदार नहीं, एक शिकारी की तरह, जो घर के किसी चेहरे पर भरोसा नहीं करती। जग्गी के सामने वो पूरा राज़ खोलती है, पर दोनों की शक की सुई घर के सबसे भरोसेमंद, सबसे लाडले चेहरे तक पहुँचते-पहुँचते फिसल जाती है। आख़िर में सुहाना
-
प्रीमियर सिर पर है और योहान बत्रा पूरे लाव-लश्कर के साथ बंगले में उतरता है, वो मख़मली, पितातुल्य और उतना ही घातक आक़ा जिसने आर्यन को बनाया और नौ साल से उसे एक राज़ की ज़ंजीर से बाँध रखा है। सुहाना पहली ही मुलाक़ात में समझ जाती है कि यही वो आदमी है जिसके खाते में आर्यन का पैसा हर महीने जाता है, और कि ये किसी भी स्टॉकर से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक है, और एक तिकोनी जंग खड़ी हो जाती है, योहान राज़ दफ़न रखना चाहता है, साया इक़बाल करवाना चाहता है, और सुहाना सच भी चाहती है और आर्यन की जान भी। योहान के सामने आर्यन नौ साल में पहली बार, एक छोटे से पर असली फ़ैसले में, अपनी सल्तनत के बजाय सुहाना को चुनता है, औ
-
योहान के पहरे से बचा कर सुहाना आर्यन को उसी पुराने थिएटर ले जाती है जहाँ इक़बाल और टूटा हुआ मिहिर उसका इंतज़ार कर रहे हैं, और चारों मिल कर नौ साल पुरानी उस रात का पूरा सच जोड़ते हैं, कि योहान को स्क्रिप्ट और चेहरा चाहिए था, आकाश ने मिटने से इनकार किया, बत्रा के आदमी ने उसे मार कर ख़ुदकुशी का रूप दे दिया, और डरा हुआ आर्यन एक बार 'रोको' चीख कर, पिट कर, फिर ख़रीद लिया गया। आर्यन पहली बार सुहाना के सामने अपनी पूरी बुज़दिली और चुप्पी क़ुबूल करता है, और वो अपनी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ पिघलने लगती है, पर आख़िर में मिहिर बताता है कि उस रात का इकलौता सबूत योहान की अपनी तिजोरी में बंद है, उसी इमारत में जहाँ त
-
प्रीमियर से दो रात पहले सुहाना आर्यन और नैरा के साथ बत्रा के उसी ऑडिटोरियम की रिहर्सल में जाती है, जहाँ ऊपरी मंज़िल पर वो तिजोरी बंद है, और चुपके से वहाँ तक का रास्ता नापती है। तभी योहान अपनी चाल चलता है, एक ऐसी आग जो देखने में साये का आख़िरी हमला लगे, पर असल में एक ही झटके में सितारे, बहन और बॉडीगार्ड, तीनों को राख कर दे। सुहाना अपनी ट्रेनिंग के दम पर जलते ऑडिटोरियम को एक बचाव-अभियान में बदल देती है, धुएँ में एक नक़ाबपोश साये के साथ एक-दूसरे की जान बचाती है बिना उसका चेहरा देखे, और आर्यन को लपटों से खींच कर बाहर निकालती है। पर बाहर आ कर, धुआँ छँटते ही उसे एहसास होता है कि एक इंसान अब भी अंदर
-
सुहाना दोबारा जलते ऑडिटोरियम में घुस कर उस फँसे हुए नक़ाबपोश साये को मलबे से खींच निकालती है और खुली रात में उसका जला हुआ नक़ाब उतारती है, और उस चेहरे को देख कर उसकी और आर्यन की साँस रुक जाती है, क्योंकि वो कोई अजनबी नहीं, वो नैरा है, आर्यन की सबसे भरोसेमंद सेक्रेटरी, आकाश की छोटी बहन, वही जो सुहाना को इस घर तक लाई थी। नौ साल का पूरा खेल एक पल में उलट जाता है। नैरा इक़बाल करती है कि वो बरसों से इस घर में सिर्फ़ इसलिए घुसी बैठी थी ताकि आर्यन से उसके भाई की चोरी और मौत का सरेआम इक़बाल करवा सके, न कि उसे मारने के लिए, कि उसकी धमकियाँ दबाव थीं और हमले नाटक, और आज की आग उसकी नहीं, ख़ुद उसे ज़िंदा ज
-
आग से बच निकले तीन लोग, तीनों के अपने-अपने ज़ख़्म और नौ साल का दबा हुआ ग़ुस्सा ले कर, एक सुनसान सेफ़ हाउस में आमने-सामने आ जाते हैं, और उनके बीच का हिसाब इस पूरे मौसम की सबसे गहरी टक्कर बन जाता है। नैरा का बरसों से जमा ग़ुस्सा आर्यन पर फूट पड़ता है, आर्यन बिना कोई बहाना बनाए अपने हर गुनाह को क़ुबूल करता है, और सुहाना अपने मरे दोस्त की बहन और उस आदमी के बीच बँट जाती है जिससे वो अपनी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ मोहब्बत करती है। जब वो एक-दूसरे को नोच रहे होते हैं, तभी सुहाना समझती है कि उनका ये आपस में टूटना ठीक वही है जो योहान चाहता है, और यहीं आर्यन माफ़ी माँगना छोड़ कर सिर्फ़ अपने किए को अपना लेता है, औ
-
बत्रा के एक ही फ़ोन की चेतावनी के बाद तीनों का गठजोड़ सबूत को बत्रा की पहुँच से बाहर ले जाने की दौड़ में लग जाता है, जिसके लिए सुहाना टूटे हुए मैनेजर मिहिर को सरकारी गवाह बनने पर राज़ी करती है और उस्ताद इक़बाल पुराने दरवाज़े खोलता है, जबकि सुहाना और नैरा उस भाई की यादों पर एक-दूसरे के क़रीब आती हैं जिसे दोनों ने खोया था। सुहाना और आर्यन एक और सधा हुआ क़दम भर एक-दूसरे की तरफ़ बढ़ते हैं और नौ साल का दर्द फिर गर्माहट में बदलने लगता है। पर उनकी हर चाल हर बार बत्रा के हाथ में उनसे एक क़दम पहले पहुँच जाती है, हर पैंतरा पहले से पकड़ा जाता है, और हर सुरक्षित रास्ता उनके पहुँचने से पहले बंद मिलता है। आ
-
अपने ही घेरे में बैठे जासूस को पकड़ने के लिए सुहाना हर इंसान को अलग-अलग एक झूठी बात बता कर जाल बिछाती है, और जब झूठ बत्रा तक पहुँचता है तो पता चलता है कि ग़द्दार कोई इंसान नहीं, एक छुपा हुआ सुनने वाला यंत्र है, और उसका तार जा कर मिलता है फ़िल्म के डायरेक्टर राजवीर से, जिसे बत्रा ने ख़रीद और डरा कर अपना मुख़बिर बना रखा था। टूटा हुआ राजवीर सब क़ुबूल कर लेता है और उसका चैनल अब बत्रा के ख़िलाफ़ मोड़ दिया जाता है। पर अब सबसे बड़ा सवाल सामने है, इंसाफ़ किस रास्ते से, उस पुलिस से जिसका आधा हिस्सा बत्रा का ख़रीदा हुआ है, या सीधे पूरी दुनिया से। और तभी आर्यन वो फ़ैसला करता है जिसकी तरफ़ पूरा मौसम बढ़ता
-
प्रीमियर की वो रात, करोड़ों लोग लाइव देख रहे हैं, और योजना अपनी जगह पर है, जब आर्यन उस विशाल मंच पर चढ़ कर दुनिया को पूरा सच सुनाना शुरू करता है, कि 'परछाईं' आकाश की चुराई हुई 'साया' थी, कि आकाश ने ख़ुदकुशी नहीं की, और कि असली क़ातिल योहान बत्रा है। पर बत्रा घबराता नहीं, वो अपना आख़िरी पत्ता फेंकता है, एक गढ़ा हुआ, गोंद से जोड़ा हुआ इक़बालनामा और नक़ली सबूत जो लाइव कैमरों पर पूरी कहानी पलट देता है और आर्यन को ही आकाश का हत्यारा साबित कर देता है, जबकि उसके आदमी बैकस्टेज सुहाना और नैरा पर घेरा कस देते हैं। भीड़ और पूरा देश आँखों के सामने आर्यन के ख़िलाफ़ मुड़ जाता है, और असली क़ातिल हीरो को फँसा
-
सबसे काली घड़ी, आर्यन पूरे देश के सामने आकाश का हत्यारा ठहराया जा चुका है और बत्रा जीत रहा है, पर मंच पर आर्यन भागने से इनकार कर देता है और माइक बंद होने के बाद भी सच चिल्लाता रहता है। इधर सुहाना बंदूक छीन कर आज़ाद होती है और नैरा को नियंत्रण-कक्ष तक खींच लाती है, जहाँ नैरा नौ साल का राज़ खोलती है, कि मरने से पहले आकाश ने अपनी ही आवाज़ में उस रात की पूरी रिकॉर्डिंग बना कर इक़बाल को सौंप दी थी, यानी असली सबूत आज भी ज़िंदा है। और तभी बत्रा अपना पितातुल्य नक़ाब उतार कर नंगा हुक्म देता है और अपने आदमियों से पूरा ऑडिटोरियम सील करा देता है।
-
सील किए ऑडिटोरियम में असली शारीरिक जंग छिड़ जाती है। सुहाना बत्रा के पेशेवर क़ातिलों के बीच से रास्ता काटती हुई जग्गी तक पहुँचती है और आकाश की अपनी आवाज़ वाली वो नन्ही रिकॉर्डिंग ले लेती है। लौटते हुए वो आर्यन को छुड़ाती है, और मौत से चंद क़दम दूर आर्यन उससे कहता है कि उसने नौ साल में एक पल भी उसे चाहना नहीं छोड़ा। पर कंसोल पर जब नैरा आकाश की आवाज़ को लाइव करने वाली होती है, बत्रा आर्यन की कनपटी पर बंदूक और कंसोल के पास एक जलती लौ लिए वहाँ पहुँच जाता है, और ठीक उस पल जब आकाश की आवाज़ करोड़ों स्क्रीन पर ज़िंदा होती है, एक अकेली गोली गरज कर चलती है।
-
धुएँ के पार वो गोली आर्यन के सीने में उतरती है, जो एक ही पल में सुहाना और मौत के बीच आ खड़ा हुआ था, और ठीक उसी पल आकाश की अपनी आवाज़ पूरे देश की करोड़ों स्क्रीन पर गूँज उठती है, जिसमें ख़ुद बत्रा का हुक्म क़ैद है। सुहाना बत्रा को पल भर में गिरा देती है, नायक उसे हथकड़ी पहना देता है, आर्यन का नाम मुजरिम से हीरो बन जाता है, पर आर्यन नीचे पड़ा ख़ून बहाता जा रहा है, और आख़िरी चीज़ जो सुनाई देती है वो है सुहाना की चीख उसके नाम की और क़रीब आती सायरनों की आवाज़।
-
सबसे लंबी रात के बाद की भोर, और आर्यन बड़ी मुश्किल से बच जाता है। अस्पताल के उस कमरे में, किसी जंग के बीच नहीं, नौ साल की दीवार आख़िरकार गिर जाती है और सुहाना-आर्यन का पहला आज़ाद, चुना हुआ चुम्बन दहलीज़ पर थम जाता है। बत्रा का पूरा जाल टूट जाता है, 'परछाईं' अपने असली नाम 'साया' और असली लेखक आकाश माथुर के नाम लौटा दी जाती है, नैरा नक़ाब उतार कर फिर नैरा माथुर बन जाती है और सुहाना उसकी बहन। आर्यन झूठी शोहरत छोड़ कर पहली बार अपना असली रूप चुनता है और मोहब्बत दो बराबर लोगों का साथ बन जाती है। आख़िर में एक हल्की आहट पहुँचती है कि बत्रा भी किसी और को पैसे भेजता था, पर वो कहानी किसी और रात की है।