नित्या के लिए ये स्कॉलरशिप सिर्फ़ काग़ज़ नहीं, उसकी और उसकी माँ की पूरी दुनिया है। कॉलेज की टॉपर होने की एक ही शर्त है, कि साल के सबसे नाकाम और नाकारा लड़के कियान को पास कराओ, वरना वज़ीफ़ा किसी और का। और कियान, पूरे कॉलेज का मशहूर 'लास्ट बेंच वाला', जो क्लास में सोता है, जवाब गोल कर देता है, और हर इम्तिहान में फिसड्डी रहता है। पर नित्या नहीं जानती कि ये लड़का जानबूझकर फेल होता है। किसी और के नाम पर, चुपके से, कियान देश के सबसे मुश्किल एंट्रेंस एग्ज़ाम पैसे लेकर पास करता है, क्योंकि ये उसके मरहूम पिता से किया एक वादा है, एक कर्ज़ जो सिर्फ़ गुमनाम रहकर ही चुकाया जा सकता है। जिसे सब नाकारा समझते हैं, वही इस कमरे का सबसे तेज़ दिमाग़ है। एक तरफ़ नित्या की स्कॉलरशिप है, जो कियान के पास होने पर टिकी है; दूसरी तरफ़ कियान का राज़, जो उसके फेल रहने पर। छत की चाय, इम्तिहान का शोर, हॉस्टल की सियासत, और एक लड़की जो उस लड़के को पढ़ाने आई है जो पहले से सब कुछ जानता है। हँसी भी, दिल भी, और एक वादे की कहानी।
विषय-सूची
-
देश की सबसे कड़ी एंट्रेंस के किलेनुमा सेंटर में एक शांत लड़का पूरा पर्चा चीर कर रख देता है, बाहर निकल कर किसी और के नाम वाला एडमिट कार्ड फाड़ता है, और सिकंदर से मोटा लिफ़ाफ़ा जेब में डाल लेता है। वही लड़का कॉलेज का मशहूर 'लास्ट बेंच वाला' कियान है। उसी दिन टॉपर नित्या को उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा झटका मिलता है, और जैसे ही वो ठान कर निकलती है, कियान के फ़ोन पर सिकंदर का पैग़ाम आता है।
-
नित्या अपने नियम गिना कर कियान को कॉलेज की छत पर, चाय की तपरी वाले ट्यूशन अड्डे पर घसीट लाती है, जहाँ वो जानबूझकर ग़लत जवाब देकर, हँसी-ठिठोली में उसे पगला देता है, और बंटी सीढ़ियों से पूरा तमाशा सुनाता रहता है। पर नित्या टॉपर है, और वो कियान की छोटी-छोटी चूकें पकड़ने लगती है, एक सवाल जो वो नींद में सुधार देता है, उसकी अपनी एक ग़लती जो वो रोक न पाने पर ठीक कर देता है। और जब वो बैग समेटती है, उसके हाथ एक मुड़ा-तुड़ा काग़ज़ लगता है, एक बेहद कठिन सवाल का बेदाग़ हल, ऐसी लिखावट में जो उसने कभी नहीं देखी, और नीचे दस्तख़त एक ऐसा नाम, जो कियान का नहीं है।
-
कॉलेज से दूर, एक तंग किराए के कमरे में, हमें कियान का असली बोझ दिखता है, एक बढ़ता कर्ज़, सूदखोर की तारीख़, और उसकी नन्ही बहन रोशनी की स्कूल फ़ीस, और उस बुद्धू के मुखौटे के नीचे का नरम भाई। सिकंदर एक बड़े, और ख़तरनाक काम के लिए उस पर दबाव डालता है। छत पर नित्या 'समर' वाले काग़ज़ पर सवाल करती है, कियान झूठ बोल कर, मज़ाक में टाल देता है, पर अचानक हुई बारिश उन्हें एक ही तिरपाल के नीचे ले आती है और जंग एक डिग्री नरम हो जाती है। फिर रोशनी के स्कूल के बाहर सूदखोर के आदमी आ खड़े होते हैं, और सिकंदर वो क़ीमत बता देता है जो इस ख़तरे को मिटा सकती है, एक नामुमकिन इम्तिहान, अब तक का सबसे बड़ा दाँव।
-
कियान बड़ा काम ले लेता है, और हमें रैकेट की पूरी मशीन दिखती है, फ़र्ज़ी एडमिट कार्ड, बायोमेट्रिक का जुगाड़, और कमीशन। उधर नित्या के लिए उसका पहला रस्मी प्रगति टेस्ट आ जाता है, और असली फँसाव सामने आता है, उसे इतने ही नंबर लाने हैं कि नित्या की शर्त बची रहे, पर एक नंबर ज़्यादा नहीं, वरना बुद्धू का मुखौटा उतर जाए। एक जीनियस अपनी ही नपी-तुली नाकामी गढ़ता है। नित्या भाँप लेती है कि ये नंबर कमाए नहीं, बनाए गए हैं, और वो बेचैन हो जाती है। और अपने पेड काम के लिए कोचिंग सेंटर पहुँचा कियान सीधे सान्या से टकरा जाता है, जो उसे वहाँ देख कर वो एक सवाल पूछ बैठती है जो सब कुछ खोल सकता है।
-
कियान एक इतनी बेवक़ूफ़ी भरी कहानी सुना कर सान्या के शक से निकल जाता है कि वो हँस कर टाल देती है, पर उस पल को दिल में नोट कर लेती है। छत की चाय पर नित्या और कियान की पहली सच्ची बातचीत होती है, और नित्या को जम्हाइयों के पीछे छिपा वो लड़का झलकता है, रोशनी के लिए उसकी बेचैन फ़िक्र, और एक ऐसी चमक जिसे वो पूरी तरह छिपा नहीं पाता। उधर सान्या स्कॉलरशिप के लिए अपनी मुहिम शुरू कर देती है, ट्रस्ट के कान में फुसफुसाती है कि नित्या एक डूबे हुए मामले पर वक़्त बरबाद कर रही है। घिरी हुई नित्या एक जोखिम भरा फ़ैसला ले लेती है, वो कियान की एक बड़ी प्रगति रिपोर्ट पर अपनी साख दाँव पर लगा देगी, बिना जाने कि उसने अप
-
मेरिट ट्रस्ट का सबसे बड़ा दानदाता, कोचिंग साम्राज्य का बादशाह यशपाल नागपाल, उसी स्कॉलरशिप की समीक्षा करने कॉलेज आता है जो नित्या को पालती है, यानी उसका पैसा, उसका शिकंजा। बरसों बाद नागपाल को आमने-सामने देख कर कियान का ग़ुस्सा उसका अपना मुखौटा लगभग तोड़ देता है, और नित्या को उसके चेहरे पर एक ऐसा अजनबी दिखता है जिसे वो समझ नहीं पाती। एक झलक पुराने ज़ख़्म को खोलती है, एक छत वाला स्कूल, एक घोटाला, एक अच्छे आदमी की बरबादी। जाते-जाते नागपाल ऐलान करता है कि वो ख़ुद हर स्कॉलरशिप छात्र की जाँच करेगा और इस मेंटरशिप में ख़ास दिलचस्पी लेगा, और मुड़ते हुए उसकी नज़र सीधे लास्ट बेंच वाले लड़के पर ठहर जाती है
-
नागपाल वाले उस पल से हिला हुआ कियान अपने तंग कमरे में लौटता है, जहाँ नन्ही रोशनी की ज़िद पर पापा की पुरानी टेप बजती है और बारह साल पुराना ज़ख़्म खुल जाता है, छत वाली मुफ़्त पाठशाला, नागपाल का रचा पेपर लीक घोटाला, और मरते पिता का वो वादा, नाम को कभी घोटाले से न छूने देना और कर्ज़ चुकने तक गुमनाम रहना। कॉलेज में नित्या उसके सहमने की वजह कुरेदती है, और आख़िर में एक ख़ाली गलियारे में नागपाल एक ठंडी लाइन बोल जाता है जो बता देती है कि वो जानता है ये लड़का किसका बेटा है।
-
हॉस्टल की मेस में बग़ावत छिड़ जाती है और बंटी मेस सेक्रेटरी का चुनाव लड़ने का ऐलान कर देता है, जिसका प्रचार कियान के ज़िम्मे आता है। जब पुराना सेक्रेटरी दद्दू एक डरे जूनियर को दबाता है, तो कियान बुद्धू बन कर, उँगलियों पर उलटा हिसाब लगा कर, उसकी चोरी का पूरा गणित सबके सामने खोल देता है, और नित्या मुखौटे के नीचे छिपे दिमाग़ की झलक पा जाती है। साझा हंगामे में दोनों पहली बार सच में साथ हँसते हैं। उधर सान्या के हाथ एक रसीद और तस्वीर लगती है जो कियान को उस दिन एक दूर के इम्तिहानी शहर में दिखाती है जिस दिन उसने कॉलेज गोल किया था, और वो उसे कॉलेज नहीं, सीधे नागपाल के पास ले जाती है।
-
अपने नामुमकिन छात्र को हल न कर पाकर नित्या वही करती है जो एक टॉपर किसी उलझे सवाल के साथ करता है, वो कियान की खोज-बीन शुरू कर देती है, और एक बेढंगी जासूसी में पीछा करते-करते पुराने शहर के एक ऐसे कोने में जा पहुँचती है जहाँ नाकाम बुद्धू एक शातिर, ख़तरनाक आदमी सिकंदर से मिल रहा है। कर्ज़ की घड़ी कसती है, और सिकंदर सबसे बड़ा काम रखता है, देश की सबसे मशहूर परीक्षा में एक टॉप-रैंक उम्मीदवार का रूप धरना, आज़ादी का टिकट और कियान की अब तक की सबसे ख़तरनाक चाल। पर सिकंदर की शर्तों में एक छिपा काँटा है, और सुनने वाले को पता चलता है कि ये फ़िक्सर बरसों से कियान का हर राज़ उसी एक आदमी तक पहुँचाता आया है जिस
-
रौनक अग्रवाल के नाम और चेहरे में, कियान देश की सबसे बड़ी परीक्षा के किलेनुमा सेंटर में घुसता है, जहाँ एक शक्की निगरान, एक बायोमेट्रिक स्कैन और हर तरफ़ कैमरे उसकी हर साँस पर नज़र रखते हैं। बाल-बाल बचते हुए वो पर्चा हल कर के निकलता है, पर पहली बार महसूस करता है कि खुली दुनिया में वो कितना बेपर्दा है। उधर कॉलेज में, अपनी टूटती शर्त बचाने के लिए, नित्या प्रोफ़ेसर सभरवाल से कियान की ग़ैरहाज़िरी पर झूठ बोल देती है और बिना पूरा सच जाने ख़ुद को उसके जुर्म में शरीक कर लेती है। कियान साफ़ बच निकलता है, पर एक फ़्लैग हुआ बायोमेट्रिक और एक धुँधली सीसीटीवी तस्वीर सामने आ जाती है, और नक़ल-विरोधी दस्ता एक प्र
-
प्रॉक्सी रैकेट की जाँच और वो धुँधली तस्वीर कियान को अंदर तक हिला देती है, कर्ज़ लगभग उतर चुका है और अब वो इस धंधे से हमेशा के लिए निकलना चाहता है, पर सिकंदर और उसके पीछे की परछाईं उसे छोड़ने को तैयार नहीं। उधर नित्या अपने सारे सुराग़ जोड़ कर छत पर उसे घेर लेती है, पर वो सच को ग़लत पढ़ती है, नक़ल, फ़रेब, या उससे भी बुरा, और बहस कच्ची और सच्ची हो जाती है, दोनों तरफ़ ग़ुस्से के नीचे से असली एहसास फूट पड़ता है। नित्या को अपनी उलझन से बचाने के लिए कियान एक ज़ालिम फ़ैसला लेता है, ट्यूशन ख़त्म, और एक ऐसा झूठ जो उसे चोट पहुँचाने के लिए गढ़ा गया हो। और नित्या, टूटी और घिरी हुई, तय करती है कि अपना वज़ीफ
-
नित्या सारे सबूतों की फ़ाइल लिए सभरवाल के दरवाज़े पर कियान को बरबाद करने को तैयार खड़ी होती है, पर बोल नहीं पाती, क्योंकि उसके गिरने से वो ख़ुद भी गिरेगी और क्योंकि उसे परवाह होने लगी है। कियान आधा सच देता है, कर्ज़ और नन्ही बहन रोशनी, पर नागपाल और रैकेट की पूरी गहराई नहीं, और नित्या तय करती है कि वो उसे ईमानदारी से पास कराएगी और राज़ रखेगी। पर गेट पर भाई का इंतज़ार करती रोशनी की एक मासूम बात से खुल जाता है कि कियान किसका बेटा है, उसी मास्टरजी देवनाथ का, वही नाम जिसे नागपाल ने दफ़ना दिया था।
-
रात भर की खोज-बीन के बाद नित्या कियान के पिता की पूरी कहानी जोड़ लेती है, छत वाला मुफ़्त स्कूल, झूठा पेपर लीक घोटाला, एक ईमानदार मास्टर की बरबादी, और वो आदमी जिसने ये सब रचा, यशपाल नागपाल, वही जिसका पैसा नित्या की अपनी स्कॉलरशिप चलाता है। बारिश में भीगती छत पर वो पहली बार कियान को पूरा देखती है और दोनों एक तिरपाल के नीचे बहुत क़रीब आ जाते हैं, पर होंठ मिलने से ठीक पहले कियान पीछे हट जाता है, क्योंकि नित्या से प्यार ही उसे ख़तरे में डाल सकता है। और जैसे ही वो पल टूटता है, नित्या वो बात कह देती है जो कियान को सबसे ज़्यादा डराती है, कि वो खुले आम नागपाल को गिराने और उसके पिता का नाम साफ़ करने में
-
यशपाल नागपाल मेरिट ट्रस्ट को हथियार बना कर नित्या की स्कॉलरशिप को सीधे कियान पर दबाव में बदल देता है, फेल होते रहो और चुप रहो, वरना लड़की सब खो देगी। ख़ून सूँघ कर सान्या अपने फ़ायदे के लिए नागपाल से हाथ मिला लेती है, बिना जाने कि किस खेल में उतर रही है, और कियान को पता चलता है कि सिकंदर के पीछे की परछाईं हमेशा से नागपाल ही था। आख़िर में नागपाल एक तारीख़ के साथ अल्टीमेटम थमाता है, फ़ाइनल में जान-बूझ कर फेल हो कर ग़ायब हो जाओ और एक आख़िरी प्रॉक्सी काम कर दो, वरना वो एक ही चाल में कियान के परिवार का नाम और नित्या का भविष्य, दोनों राख कर देगा।
-
कैमरा सान्या की तरफ़ मुड़ता है, उसका डर, उसका कर्ज़ में डूबा घर, वो पूरा परिवार जो उसके एक नंबर पर टिका है, और हम देखते हैं कि वो कोई खलनायिका नहीं, नित्या जैसी ही एक घिरी हुई लड़की है। वो अपना पत्ता खेल कर साबित कर देती है कि कियान के प्रगति नंबर बनाए हुए थे, जिससे एक औपचारिक समीक्षा बैठ जाती है जो नित्या की शर्त को उसी पल तोड़ सकती है। उस मज़ाकिया वाइवा में, नित्या को बचाने के लिए कियान एक नामुमकिन सवाल का जवाब जान-बूझ कर बेहतरीन ढंग से देता है और अपना बुद्धू वाला मुखौटा ख़ुद अपने हाथों चीर देता है, पहली बार उसके लिए ख़ुद को ख़तरे में डालते हुए। पैनल दंग रह जाता है, और उसी कमरे में बैठा नागप
-
नक़ल-विरोधी दस्ता अलग-अलग नामों के नीचे आई नामुमकिन रैंकों का एक पैटर्न जोड़ कर एक ही हल करने वाले तक पहुँचने लगता है, और कियान के पकड़े जाने का ख़तरा चरम पर पहुँच जाता है। जाल बंद होने से पहले निकलने के लिए वो अपने कर्ज़ का आख़िरी हिसाब चुकाने की दौड़ लगाता है, अपने पापा के गिरवी पड़े घर के काग़ज़ छुड़ाने की, और एक हीस्ट जैसा आख़िरी काम बीच में बिगड़ जाता है। अब उसके राज़ की साथी बनी नित्या बाहर से अपने दिमाग़ से पूरी चाल बुनती है और बंटी बिना जाने मसल बन जाता है, और पहली बार दोनों एक टीम की तरह काम करते हैं। आख़िर में पैसा हाथ आ जाता है और कर्ज़ का पहाड़ ख़त्म होने की कगार पर पहुँच जाता है,
-
गेट पर खड़े नक़ल-विरोधी अफ़सर के सामने कियान आख़िरी बार बुद्धू वाला मुखौटा पहन कर बच निकलता है, फिर उसी दोपहर सेठ धनराज को आख़िरी नक़दी दे कर अपने मरहूम पिता के गिरवी पड़े घर के काग़ज़ छुड़ा लेता है, बारह साल का कर्ज़ ख़त्म। छत पर वो पहली बार नित्या को पूरा सच बताता है, रैकेट, सिकंदर, और उसके पीछे हमेशा से नागपाल, और आख़िर में अपना सबसे बड़ा राज़, कि वो बारह साल से चुपके से नागपाल के ख़िलाफ़ पैसा और सबूत जमा कर रहा था, और पिता का नाम साफ़ करने वाला आख़िरी सबूत ख़ुद नागपाल के दफ़्तर की तिजोरी में बंद है।
-
फ़ाइनल से एक रात पहले, छत पर, नित्या, कियान और बंटी शीशे की मीनार का नक़्शा बिछा कर वो योजना बुनते हैं जिससे नागपाल की तिजोरी से पिता का नाम साफ़ करने वाली बारह साल पुरानी फ़र्ज़ी फ़ाइल निकाली जा सके, ठीक उसी दोपहर जब फ़ाइनल का पर्चा और नागपाल का ट्रस्ट ऑडिट एक साथ होंगे। उसी रात छत पर दोनों पहली बार खुल कर एक-दूसरे को चुनते हैं, एक साफ़, कोमल वादा, आख़िर तक साथ। अगले दिन बंटी नागपाल को कॉलेज में बातों में उलझाए रखता है, कियान मीनार में चढ़ कर तिजोरी खोल कर फ़ाइल तक पहुँच जाता है, पर ऐन आख़िरी पल नागपाल का पलटवार जाग उठता है।
-
अगली सुबह नागपाल अपना पलटवार खोल देता है, कियान का नाम नक़लची रैकेट के हल करने वाले के रूप में कॉलेज और अफ़सरों के सामने उजागर, नित्या की स्कॉलरशिप जाँच में रुकी, और बारह साल पुराना घोटाला फिर से देवनाथ मास्टर के नाम से चिपका दिया गया, ठीक वही बदनामी जिससे बचने के लिए पिता ने वादा लिया था। नित्या और रोशनी को बचाने के लिए कियान अकेले फँदे में सिर देने की सोचता है, और मरते पिता का वादा, गुमनाम रहो, नाम बचाओ, इस सच से टकरा जाता है कि अब सिर्फ़ रौशनी में आ कर ही जीता जा सकता है। और आख़िर में सबसे क़रीबी दग़ा दे जाता है, सिकंदर नागपाल से सौदा कर के कियान के ख़िलाफ़ गवाही देने को राज़ी हो जाता है, औ
-
कियान हिरासत में है, कॉलेज बदनामी से भरा है, पर नित्या इतिहास को दोबारा नहीं होने देती। वो पहले डगमगाती प्रोफ़ेसर सभरवाल के सामने इंसाफ़ की गुहार लगाती है, फिर रोशनी के साथ पुराने मोहल्ले की उसी छत पर जाती है जहाँ देवनाथ मास्टर ग़रीब बच्चों को मुफ़्त पढ़ाते थे, और उस भूले हुए नाम की सच्चाई शहर के सामने लाने लगती है। रोशनी के ज़रिए पिता की एक बात पूरी कहानी का दिल खोल देती है, नाम वो नहीं जो लोग पुकारते हैं, नाम वो है जो तुम चुपचाप किसी और के लिए करते हो। बंटी हॉस्टल जगा देता है और वो सब छात्र सामने आने लगते हैं जिन्हें कियान चुपके से सँभालता आया था, और सभरवाल पलट कर साथ खड़ी हो जाती है। और आख़
-
भरी हुई जाँच सभा में, कैमरों और पूरे शहर के सामने, कियान बारह साल पुराना बुद्धू वाला मुखौटा हमेशा के लिए उतार देता है। हाँ, वो मानता है कि समर, अंकित और रौनक वही था, पर फिर पूरी कहानी उलट देता है, ये रैंक बेचने और छात्रों को ब्लैकमेल करने वाली पूरी मशीन किसने बनाई, किसकी जेब में हर रुपया गया, और सिकंदर किसका हाथ था, इसका सबूत खोल कर वो सीधे यशपाल नागपाल की तरफ़ उँगली उठा देता है। जिस-जिसने कभी लास्ट बेंच वाले का मज़ाक उड़ाया था, वो सब जान जाते हैं कि वो लड़का असल में क्या है। और फिर वो बारह साल पुराने ज़ख़्म को खोल देता है, कि इसी आदमी ने इसी तरीक़े से उसके ईमानदार पिता देवनाथ मास्टर को चोर बन
-
जाँच सभा में हारने के बाद, नागपाल रातों-रात अपनी आख़िरी चाल चलता है, वकील, ख़रीदे हुए गवाह, और धमकियाँ, ताकि सुबह होने से पहले सारे सबूत राख हो जाएँ और सब चुप हो जाएँ, और रोशनी तथा नित्या पर मँडराता ख़तरा सच बन जाता है। नित्या के पास अब सिर्फ़ एक ही रास्ता है, वो लड़की जिससे उसे सबसे ज़्यादा नफ़रत करनी चाहिए थी, सान्या। अपने डूबे हुए घर और नागपाल के ख़रीदे कर्ज़ के बोझ तले दबी सान्या आख़िरकार अपने ज़मीर का सामना करती है और सही चुनती है, वो सारे सबूत जो उसने नित्या के ख़िलाफ़ जमा किए थे, नागपाल की तरफ़ मोड़ देती है। शीशे की मीनार की अँधेरी सबसे ऊँची मंज़िल पर, जहाँ पिता का नाम साफ़ करने वाली फ़
-
अँधेरे में गिरने वाला कोई और नहीं, ख़ुद नागपाल था, और सान्या के दुपट्टे में लिपटी वो अधजली फ़ाइल, आधी राख हो कर भी, अपनी सबसे ज़रूरी लाइन के साथ बच जाती है। सुबह होते-होते सान्या की भेजी नक़लें बोर्ड और अख़बारों तक पहुँच चुकी हैं, नागपाल का पूरा साम्राज्य ईंट-ईंट कर के ढह जाता है, और बारह साल से दबा एक नाम, देवनाथ मास्टर, पहले पन्ने पर एक बेगुनाह के तौर पर छपता है। कियान हिरासत से रिहा हो कर, इस बार अपने ही चेहरे के साथ, बोर्ड के सामने खड़ा होता है, अपने जुर्म का हिसाब देता है, रैकेट से कमाया हर रुपया लौटा देता है, और सज़ा की जगह दो साल ग़रीब बच्चों को मुफ़्त पढ़ाने का कर्ज़ उतारने को क़बूल कर
-
जंग जीत ली गई है और दोनों के बीच का हर झूठ मिट चुका है, तो अब वो प्यार, जिसे चौबीस कड़ियों से रोका जा रहा था, पहली बार खुले में, अपने आप, चुन लिया जाता है, कोमल, साफ़ और सच्चा। हॉस्टल में बंटी इस बात पर मचल उठता है कि उसका बग़ल वाला बेंच वाला दोस्त बारह साल तक देश का सबसे तेज़ दिमाग़ छुपाए बैठा रहा, छत की चाय पर पायल नित्या को छेड़ती है, और सुधरा हुआ मेरिट ट्रस्ट, नागपाल के ज़हरीले पैसे और उसकी ज़ालिम शर्त से आज़ाद हो कर, नित्या का वज़ीफ़ा उसकी मेहनत पर बहाल कर देता है और सान्या को भी एक ईमानदार सहारा देता है, यानी अब दोनों को ऊपर उठने की जगह मिल जाती है। उसी शाम, उसी पुरानी तिरपाल के नीचे, कि
-
कुछ महीने बाद, नतीजों की एक ऐसी सुबह जिसमें डर नहीं है। नागपाल की मीनार पर ताला है, और पुराने मोहल्ले की उसी छत पर, जहाँ कभी एक मास्टर चुपके से पढ़ाता था, अब एक खुला स्कूल है, दीवार पर एक नई पीतल की पट्टी, जिस पर वो नाम खुदा है जिसे बारह साल पहले घिस कर मिटाया गया था, देवनाथ मास्टर मुफ़्त पाठशाला। बंटी दौड़ता हुआ ख़बर लाता है कि कियान, अपने ही असली नाम से, पूरे देश में नंबर एक आया है, पर देश का नंबर एक किसी मंच पर नहीं, उसी छत पर ज़मीन पर बैठ कर एक बच्चे को तीन का पहाड़ा पढ़ा रहा है। जिन बच्चों की उसने बरसों गुमनाम फ़ीस भरी थी वो लौट आते हैं, रोशनी अब खुले में, धूप में, सबसे आगे बैठने वाली एक