अध्याय 6 / 12 18+
Episode 6: आग
शर्तें द्वारा Hamid Siddiqui
गाला के बाद Malhotra का प्रस्ताव मीरा के मन में तूफान ला रहा था। Aarav और मीरा के बीच की दीवारें टूटती हैं और रात एक नई आग में बदल जाती है। पर सुबह के सन्नाटे में Aarav के एक इकबाल ने सब कुछ बदल दिया।
गाला खत्म हो चुका था। Car की पिछली सीट पर मीरा चुपचाप बैठी थी। Malhotra की आवाज़ अभी भी उसके कानों में गूंज रही थी। उसकी आँखें Aarav की तरफ़ गईं जो सामने बैठे ड्राइव कर रहे थे।
घर पहुँचते ही Aarav ने दरवाज़ा खोला और मीरा के लिए हाथ बढ़ाया। दोनों के बीच की हवा भारी थी। कोई कुछ बोला नहीं। बस नज़रें मिलीं और कुछ टूट गया।
"आज रात तुम बहुत खामोश हो। कुछ हुआ है क्या?"
"नहीं... बस थक गई हूँ।"
Aarav ने मीरा का हाथ पकड़ा और धीरे से खींचा। वो रोक नहीं पाई। दोनों सीढ़ियाँ चढ़ते हुए ऊपर गए। bedroom का दरवाज़ा बंद हुआ तो Aarav ने मीरा को दीवार से लगा लिया।
"मीरा... मैं और इंतज़ार नहीं कर सकता।"
"Aarav... ये गलत है।"
"फिर भी... मुझे रोक मत।"
Aarav ने मीरा के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। kiss धीमा शुरू हुआ फिर गहरा हो गया। मीरा की उँगलियाँ Aarav की शर्ट में घुस गईं। कपड़े एक-एक करके फर्श पर गिरने लगे।
"Aarav... आह..."
Aarav ने मीरा की गर्दन पर kiss किया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। मीरा ने Aarav की पीठ पर नाखून गड़ा दिए। बिस्तर तक पहुँचते-पहुँचते दोनों की साँसें एक हो चुकी थीं।
"तुम्हारी skin... इतनी नरम है।"
"और जोर से... हाँ... आह..."
Aarav ने मीरा को बिस्तर पर लिटाया। उसके शरीर पर हाथ फिराए। kiss अब और गर्म हो चुके थे। मीरा ने Aarav को अपने ऊपर खींच लिया।
"मीरा... मैं तुम्हें चाहता हूँ।"
"Aarav... please..."
उनके शरीर एक हो गए। कमरे में सिर्फ़ साँसों की आवाज़ और soft moans गूंज रहे थे। Aarav ने मीरा के बालों में उँगलियाँ फेरते हुए उसे और पास खींचा।
"हाँ... आह... Aarav..."
"तुम मेरी हो... आज रात।"
लंबे समय तक दोनों एक-दूसरे में खोए रहे। passion की आग पूरे कमरे में फैल चुकी थी। आखिरकार दोनों थककर एक-दूसरे की बाहों में लेट गए।
कुछ देर बाद Aarav ने मीरा के बालों को सहलाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में अब वो सख्ती नहीं थी जो हमेशा होती थी।
"मीरा... मैं नहीं जानता ये सब कैसे हुआ। पर तुम्हारे साथ... मैं पहली बार महसूस कर रहा हूँ कि शायद... मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ।"
मीरा का दिल एक पल के लिए रुक गया। Aarav की बातें उसके कानों में गूंज रही थीं। Malhotra का सौदा अभी भी उसके दिमाग में था। Aarav का खुला दिल और उसका छुपा हुआ राज... दोनों आमने-सामने खड़े थे।
"Aarav... तुम ये मत कहो।"
"क्यों? ये सच है। पहली बार किसी को इतना close महसूस कर रहा हूँ।"
मीरा की आँखें डबडबा आईं। वो Aarav को देख नहीं पा रही थी। उसका बदला, उसका पिता, और ये आदमी जो अब उसे प्यार करने लगा था... सब एक साथ टूट रहा था।
"मुझे... मुझे लगता है मुझे air चाहिए।"
मीरा बिस्तर से उठकर खिड़की के पास गई। बाहर अंधेरा था। अंदर उसका दिल जल रहा था। Aarav की बातें अब भी उसके कानों में बज रही थीं। और Malhotra की आवाज़ भी।
उसने आँखें बंद कीं। एक तरफ Aarav का प्यार... दूसरी तरफ उसके पिता का इंतकाम। दोनों में से एक को चुनना होगा। और कोई भी चुनाव उसे तोड़ देगा।