Chapter 10 of 12 18+
Episode 10: जाल
खतरनाक रात में मीरा मल्होत्रा के पास सबूत चुराने के लिए कदम रखती है। आरव के साथ उनकी दीवार टूटती है और वो एक-दूसरे को चुन लेते हैं। लेकिन मल्होत्रा पहले से ही एक कदम आगे था। एक जाल जो मीरा को प्यार और आजादी के बीच फंसा देता है।
hospital वाली रात के बाद वो पल आ ही गया। वो खतरनाक रात। मीरा ने black dress पहना था। उसकी आँखों में दस साल का grief था, Aarav के लिए guilt था, और अब एक नई determined चमक। Plan simple था। वो मल्होत्रा के पास जाएगी, pretend करेगी कि bargain accept कर लिया है, और उसके vault से proof निकाल लेगी। लेकिन दोनों जानते थे कि ये मौत के मुंह में कूदना था।
"मीरा... मैं अभी भी कह रहा हूँ, ये plan suicidal है। वो जानता है तुम Ramesh Joshi की बेटी हो। उस entry को Deshpande ने flag कर दिया था। अगर उसे जरा सा शक हुआ तो वो तुम्हें कभी बाहर नहीं आने देगा।"
"आरव, हमारे पास वक्त नहीं है। सात दिन का notice अभी भी खड़ा है। पैंतालीस करोड़ हमें डुबो देंगे। दादी ICU में हैं। तीन सौ परिवार सड़क पर हैं। ये अकेला रास्ता है। मुझे अंदर जाना होगा।"
घर का वो drawing room अचानक बहुत छोटा लगने लगा था। घड़ी की सुईयाँ तेज चल रही थीं। बाहर बारिश शुरू हो गई थी। जैसे पूरा शहर भी जानता हो कि आज कुछ बहुत बड़ा होने वाला है। आरव की आँखों में गुस्सा, डर और कुछ और भी था। कुछ जो वो अब छुपा नहीं पा रहा था।
"जब तुम hospital आई थी, मैंने कहा था कि ये सिर्फ मजबूरी का alliance है। पर ये झूठ था मीरा। तुम चली गई थीं ना, तब समझ आया। मैं तुमसे नफरत नहीं कर पाया। भले ही तुमने मुझे इस्तेमाल किया, भले ही तुमने मुझे तोड़ा।"
"मैंने तुम्हें जितना दर्द दिया... वो मेरे पापा के बदले के नाम पर था। पर कहीं बीच में तुम मोहरा नहीं रह गए। तुम इंसान बन गए। जिसके साथ मैं हँस सकती हूँ, जिसके साथ मैं... खुद को भूल जाती हूँ।"
आरव ने धीरे से उसकी तरफ बढ़ा। उसके हाथ काँप रहे थे। उसने मीरा का चेहरा अपने हाथों में लिया। पहली बार कोई दीवार नहीं थी। कोई झूठ नहीं था। सिर्फ दो लोग थे जो जानते थे कि ये रात आखिरी भी हो सकती है।
"तो फिर आज रात, उस मल्होत्रा के पास जाने से पहले, मुझे एक बार सच सुन लो। मैं तुमसे प्यार करता हूँ मीरा। सच्चे वाला प्यार। वो वाला जो डरता है, जो टूटता है, लेकिन फिर भी तुम्हें छोड़ना नहीं चाहता।"
"आरव... मुझे लगता था मैंने ये हक हमेशा के लिए खो दिया है। दस साल बदले ने मुझे पत्थर बना दिया था। पर तुमने... तुमने मुझे फिर से इंसान बना दिया। मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ। बिना किसी शर्त के।"
बारिश की आवाज तेज हो गई। उनके बीच की सारी distance, सारे झूठ, सारी शर्तें एक पल में गायब हो गईं। आरव ने उसे अपनी तरफ खींचा। उनका kiss पहले हल्का था, फिर गहरा, जैसे सारी दुनिया को रोकना चाहते हों।
"अगर आज कुछ हुआ तो... मुझे पता है मैंने तुम्हें बहुत दुख दिया। पर आज मैं तुम्हारी हूँ आरव। पूरी तरह।"
"और मैं तुम्हारा। चाहे कल कुछ भी हो जाए।"
उस kiss ने आग जगा दी। आरव के हाथ मीरा की पीठ पर फिसल गए। उसके कपड़ों की zipper खुल गई। मीरा की साँसें भारी हो गईं। वो दोनों जानते थे कि घड़ी चल रही है, मल्होत्रा इंतजार कर रहा है, लेकिन इस पल में सिर्फ वो दोनों थे।
"आरव... मुझे feel करो। आज सब कुछ भूल जाओ। सिर्फ हमें।"
आरव ने उसे उठाया और बेडरूम की तरफ ले गया। दरवाजा बंद हुआ। बाहर बारिश बरस रही थी। अंदर दो दिल जो दस साल की जंग के बाद आखिरकार एक हो रहे थे।
"तुम्हारी skin... कितनी गर्म है।"
"छूओ मुझे... everywhere।"
कपड़े फर्श पर गिर गए। उनकी bodies एक दूसरे से चिपक गईं। Aarav के होंठ मीरा के गले पर, फिर नीचे। मीरा की उँगलियाँ उसके बालों में। साँसें एक हो गईं।
"मीरा... मैं तुम्हें कितना चाहता हूँ।"
"आरव... हाँ... right there।"
वे बेड पर गिरे। Aarav ने धीरे से उसके अंदर प्रवेश किया। दोनों की आँखें मिलीं। ये सिर्फ physical नहीं था। ये forgiveness था, ये acceptance था, ये वो प्यार था जो danger के बीच भी खिल रहा था।
"God... you feel like home।"
"Faster आरव... please... मैं तुम्हें feel करना चाहती हूँ... deep।"
Their rhythm तेज हो गया। Bodies sweaty, voices breaking। मीरा की टाँगें आरव की कमर के चारों तरफ। हर thrust के साथ वो और करीब आ रहे थे। दर्द, guilt, fear, सब pleasure में डूब गया।
"मीरा... मैं... I'm so close..."
"साथ में... आरव... साथ में आओ... ahhh... हाँ...!"
दोनों का climax एक साथ आया। मीरा चीख पड़ी, आरव का नाम अपने होंठों पर लिए। Their bodies shook together, waves after waves। वो एक दूसरे को इतनी जोर से पकड़े हुए थे जैसे दुनिया छिन जाएगी।
"I love you... मीरा... I love you so damn much।"
"मैं भी... forever।"
कुछ देर वो ऐसे ही लेटे रहे। बारिश की आवाज, उनकी साँसें, और दिलों की धड़कन। मीरा आरव की छाती पर सिर रखे थी। इस पल में सब कुछ perfect था। लेकिन perfect पल हमेशा टिकते नहीं।
"तुम अभी भी जाना चाहती हो? हम कुछ और सोच सकते हैं।"
"मुझे जाना ही होगा आरव। पर अब मैं अकेली नहीं हूँ। तुम मेरे साथ हो। ये knowledge enough है।"
मीरा ने उठकर dress पहनी। आरव भी उठा। उन्होंने एक आखिरी kiss लिया। लेकिन जैसे ही मीरा दरवाजे की तरफ बढ़ी, Aarav का phone बज उठा। Unknown number। उसने speaker पर लगाया।
फोन पर कोई आवाज नहीं आई। सिर्फ एक recorded message। मल्होत्रा की ठंडी, calculated voice। 'Meera Joshi, या मुझे कहना चाहिए forensic accountant जो अपने पिता का बदला लेने आई थी। तुम्हें लगा तुम मुझे fool कर रही हो?'
"क्या है ये? मीरा, ये..."
Message जारी रहा। 'मैं जानता था तुम वापस आओगी। तुम्हारा plan, Aarav के साथ तुम्हारा romantic reunion, सब कुछ मैंने anticipate किया था। तुम्हें लगता है तुम मेरे vault से proof निकाल लोगी? वो proof तो मेरे पास है... लेकिन वो proof तुम्हारे खिलाफ है।'
"नहीं... ये नहीं हो सकता।"
मल्होत्रा की voice और ठंडी हो गई। 'Deshpande ने जो entry flag की थी? वो expert touch? वो तुम्हारा काम था Meera। तुमने Meridian Holdings का trail hide करने के लिए ledger में tampering की। मेरे पास full digital trail है। Forgery, fraud, corporate espionage। तुम्हें दस साल की jail हो जाएगी। और Aarav की company? वो तो already मेरी है।'
"बंद करो ये। हम लड़ेंगे।"
Message का आखिरी हिस्सा सबसे खतरनाक था। 'अब choice तुम्हारे पास है बेटी। या तो तुम Aarav को betray कर दो। Company मुझे सौंप दो। Meridian का पूरा control मुझे दे दो। और मेरे साथ आ जाओ। मैं तुम्हें वो proof दे दूँगा जो तुम्हारे पिता को clear करता है। या फिर... तुम दोनों जेल जाओगे। तुम्हारा choice। मेरा offer twenty minutes तक valid है।'
"आरव... वो सब जानता था। हमारा हर step। हमारा प्यार भी... वो सब anticipate कर चुका था।"
"मीरा, हम together लड़ेंगे। मैं तुम्हें नहीं खोने दूँगा। न company, न तुम।"
मीरा का फोन भी vibrate हुआ। मल्होत्रा का text। Proof की photo। Ledger entry। Her digital signature। Clear evidence जो उसे जेल भेज सकता था। और Aarav की company के transfer papers।
"दस साल... दस साल का बदला। पापा की इज्जत। और अब... आरव। मैं किसे चुनूँ? अगर मैं Aarav को चुनती हूँ तो पापा forever guilty रहेंगे। अगर मैं मल्होत्रा को चुनती हूँ तो... मैं उससे प्यार करने वाले इंसान को खुद ही खत्म कर दूँगी।"
बारिश और तेज हो गई थी। मीरा जाल में फँस चुकी थी। वो जाल जिसे उसने खुद बुनना चाहा था। अब उसके सामने दो रास्ते थे। एक तरफ वो आजादी जो दस साल से चाहती थी। दूसरी तरफ वो इंसान जिसे उसने सच में प्यार कर लिया था। घड़ी चल रही थी। बीस मिनट। और मीरा जोशी, जो कभी किसी शर्त से नहीं डरी, आज पहली बार सच में trapped थी।