कानपुर के पुराने चतुर्वेदी घर में तीन पीढ़ियाँ एक ही छत के नीचे रहती हैं, और तीनों ने चुपके-चुपके एक ही मैट्रिमोनियल ऐप 'परफेक्ट रिश्ता' पर अपनी किस्मत आज़माने की ठान ली है। तलाकशुदा बेटी सांवी, जिसे रिश्तेदार तरस भरी नज़रों से देखते हैं, एक नकली नाम 'काया' के पीछे छिपकर फिर से जीना चाहती है। विधुर पिता जगदीश, अकेलेपन से थका हुआ, ख़ुद को रिटायर्ड 'कर्नल रणविजय' बताकर एक नई शुरुआत का सपना देखता है। और तेज़-तर्रार दादी पुष्पा अपने शरमीले पोते मानव की प्रोफ़ाइल उसे बताए बिना ख़ुद चला रही है। मुश्किल तब खड़ी होती है जब ऐप का 'परफेक्ट मैच' एल्गोरिदम इन्हीं तीनों को एक-दूसरे की ज़िंदगी में टकराने लगता है, नकली नाम असली दिलों से जा भिड़ते हैं, और घर का इकलौता राज़दार बनता है सोलह साल का गोलू। ग़लत चैट में गया मैसेज, मोहल्ले की जासूस चाँचल आंटी, और हर उम्र पर एक सच्चा दूसरा मौका, यह एक गर्मजोश, हँसाने वाली पारिवारिक कहानी है जहाँ हर झूठ के नीचे प्यार की एक अधूरी ख़्वाहिश छिपी है।
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कानपुर के चतुर्वेदी घर में एक रविवार का रिश्ता देखने का जलसा तब बिखर जाता है जब लड़के वाले सांवी के तलाक़ और मानव की बेरोज़गारी पर तंज़ कसते हैं। उसी शाम, अलग-अलग कमरों में, तीन ठुकराए हुए दिल एक ही तरकीब की तरफ़ बढ़ते हैं, और रात को गोलू देखता है कि एक ही मिनट में तीन स्वागत ईमेल आ गिरते हैं और ऐप उसके अपने पापा का रिश्ता उसकी अपनी बहन को सुझा देता है।
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कर्नल रणविजय बने जगदीश को सरिता नाम की एक औरत का पहला गर्मजोश जवाब मिलता है, और वो ख़ुशी में घबरा कर रात दो बजे तक फ़ौजी शब्द रटता है। उधर दादी पुष्पा मानव के नाम से इरा नाम की एक तेज़-तर्रार लड़की को रिझाती हैं, जबकि असली मानव बेख़बर मुँह फुलाए घूमता रहता है। गोलू, जो अब घर का चोरी-छिपा आई-टी विभाग बन चुका है, तीनों प्रोफ़ाइलों को टकराने से बचाने की जी-तोड़ कोशिश करता है। पर रात के खाने पर जगदीश का सरिता के लिए भेजा प्यार भरा वॉइस नोट अचानक घर के फ़ैमिली ग्रुप के स्पीकर पर बज उठता है, और हर सिर मुड़ जाता है।
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काया बन कर सांवी की मुलाक़ात एक कोमल, मज़ाकिया आदमी अनिकेत से होती है, और दो साल में पहली बार वो अपने ही फ़ोन पर खिलखिला कर हँसती है। उसे नहीं पता कि यही अनिकेत उसकी असली ज़िंदगी में भी बुना हुआ है, उसकी नन्ही बेटी सांवी की बेकरी के बग़ल वाले स्कूल में आई है और उसकी रोज़ की चाय सांवी के ही काउंटर पर तय है, पर दोनों में से कोई नहीं जानता कि वो एक-दूसरे का ऑनलाइन मैच है। उधर असली मानव एक कैफ़े की मेज़ पर इरा से टकरा कर पहली नज़र में उससे चिढ़ जाता है, जबकि ऑनलाइन मानव और इरा और क़रीब आ रहे हैं। वीडियो कॉल के बीचों-बीच सांवी अचानक अनिकेत को अपनी गली वाला चाय वाला पहचान लेती है और घबरा कर लैपटॉप ब
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मोहल्ले की ख़ुद-नियुक्त जासूस चांचल आंटी को चतुर्वेदी घर में राज़ों की बू आ जाती है, और दूरबीन तथा एक व्हाट्सएप ब्रॉडकास्ट लिस्ट के साथ वो जाँच पर उतर आती है। उधर इरा की ज़िद के आगे दादी पुष्पा को मानव बन कर फ़ोन पर बात करनी पड़ती है, पर जवान मर्द की आवाज़ न निकाल पाने पर वो शरमाए हुए गोलू को अपनी लिखी लाइनें बुलवाने बैठा देती है, और झूठ दो परतों गहरा हो जाता है। सांवी इस उलझन में फँसी है कि अनिकेत को काया का सच बताए या नहीं। तभी चांचल ऐलान करती है कि उसने बेचारी तलाक़शुदा सांवी के लिए एक 'परफेक्ट सेटल्ड लड़का' ढूँढ लिया है और उसके पूरे परिवार को कल शाम बुला लिया है, और दरवाज़े की घंटी एक दिन
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बिन बुलाए रिश्ते को सांवी नई हिम्मत से लौटा देती है, और चांचल आंटी मुँह लटकाए विदा होती हैं। उधर दादी पुष्पा की पर्चियों पर गोलू, मानव बन कर, इरा से फ़ोन पर बात करता है, और हज़ार ग़लतियों के बावजूद बातचीत ख़ूबसूरती से चल निकलती है। पर उसी दिन असली मानव फिर इरा से भिड़ जाता है, और इरा एक ही नाम के दो बिल्कुल अलग आदमियों से उलझ कर रह जाती है। जगदीश घबराते हुए सरिता से आमने-सामने मिलने की ठानते हैं। और आख़िर में इरा 'मानव' से इसी हफ़्ते मिलने की ज़िद कर बैठती है, ठीक उसी कैफ़े में जहाँ असली मानव अपने ओपन-माइक करता है, और पुष्पा को एहसास होता है कि झूठ अब सीधे सच से टकराने वाला है।
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शनिवार आ गया, और गोलू भेड़ों को हाँकते कुत्ते की तरह हर किसी को अलग-अलग रखने की जान लगा देता है, ताकि इरा नक़ली मानव के जाल में न फँस जाए। उधर उसी पुराने कैफ़े में जगदीश और सरिता की पहली मुलाक़ात होती है, दो घबराए हुए बुज़ुर्ग, बरसों बाद इतने मीठे और इतने बहादुर, वो कर्नल का नाटक निभाता है और वो गर्मजोशी से हर बात पर यक़ीन करने का नाटक करती है। सांवी अनिकेत को लगभग सब कुछ बता ही देती है। पर तभी वही कैफ़े उन सबको एक साथ थाम लेता है, जगदीश जैसे ही सरिता का हाथ थामने बढ़ते हैं, कमरे के उस पार उन्हें अपनी बेटी सांवी दिख जाती है, और सरिता की नज़र दरवाज़े से अंदर आते अनिकेत पर पड़ती है।
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कैफ़े का जमा हुआ पल टूटता है और चार लोग एक साथ भागते हैं, हर कोई एक अलग सच से। जगदीश कर्नल का नक़ाब सँभाले, मेन्यू को ढाल बना कर अपनी ही बेटी सांवी की नज़र से भाग निकलता है, सरिता अपने बेटे अनिकेत से मुँह छुपा लेती है, और सांवी अनिकेत को अधूरा सच बता कर घबरा कर निकल जाती है। उधर इरा आठ बजे नक़ली मानव के इंतज़ार में आती है और स्टेज पर उसे बदमिज़ाज असली मानव मिल जाता है, और गोलू चार मोर्चों पर एक साथ आग बुझाता है। घर लौट कर सांवी काया बन कर अनिकेत को माफ़ी का मैसेज भेजती है, पर वो ग़लती से बेकरी वाले नंबर से, अपने असली नाम के साथ अनिकेत के पास पहुँच जाता है, और अनिकेत पहली बार 'सांवी' नाम पढ़ कर
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अनिकेत के हाथ अब एक असली नाम है, 'सांवी', और अगली सुबह बेकरी पर चाय पीते हुए वो उसी एक चेहरे में दो औरतों को देखता है, काया और सांवी, और नरमी से टटोलता है, जबकि सांवी, बेख़बर कि उसका राज़ खुल चुका है, और भी सख़्ती से छुपने लगती है। उधर इरा के शक को शांत करने के लिए दादी पुष्पा को 'मानव' बन कर एक पूरा नक़ली चचेरा भाई गढ़ना पड़ता है, और झूठ एक परत और गहरा हो जाता है, गोलू सिर पकड़ लेता है। जगदीश अपनी ही बेटी के हाथों पकड़े जाने से घबरा कर ऐप छोड़ना चाहता है, पर सरिता की एक गर्म चिट्ठी उसे लौटा लाती है। और रात को गोलू ऐप का नया 'फ़ैमिली सर्कल' फ़ीचर देख कर जम जाता है, जो चौबीस घंटे में घर की हर प
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गोलू रात भर जाग कर, चिप्स और डर के सहारे, 'फ़ैमिली सर्कल' के जाल को घर के लिए बंद कर देता है, पर उस क़रीबी बचाव ने सबको और डरा दिया है। अगली शाम सांवी और अनिकेत, पहली बार बिना किसी नक़ली नाम के, बेकरी के शांत कोने में अपने असली रूप में मिलते हैं और सच में जुड़ जाते हैं, दोनों उस ऐप का ज़िक्र टालते हुए जो उन्हें पहले ही जोड़ चुका है। उधर असली मानव और इरा नोक-झोंक में सच में एक-दूसरे को पसंद करने लगते हैं, पर इरा बार-बार 'दूसरे मानव' की तारीफ़ करती है जिसे असली मानव जानता ही नहीं। और आख़िर में इरा ख़ुश हो कर मानव को 'मानव चतुर्वेदी' के साथ अपनी प्यारी चैट का स्क्रीनशॉट दिखाती है, अपने ही नाम और
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मानव अपने ही नक़ली रूप का जासूस बन जाता है, और उसकी बेढंगी तफ़्तीश हर सुराग़ के साथ अपने ही घर की तरफ़ घूमती जाती है, दिवाली वाली फ़ोटो, आधी रात के मैसेज, घर की छोटी-छोटी बातें जो कोई बाहरी नहीं जान सकता। उधर गोलू और दादी पुष्पा घबराहट में निशान मिटाते फिरते हैं, पर दादी रुकने से साफ़ इनकार कर देती हैं। इसी बीच सांवी और अनिकेत असल में और क़रीब आते हैं, और जगदीश ठान लेता है कि वो सरिता को सच बता देगा कि वो कोई कर्नल नहीं। और आख़िर में मानव इरा से कहता है कि वो अभी, इसी वक़्त, अपने अकाउंट से उसे एक मैसेज भेजेगा, इरा फ़ोन देखती रहे, अगर मैसेज आया तो नक़ली मानव इसी घर में, अभी ऑनलाइन है, और वो भेज
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मानव का जाल दादी पुष्पा को ऐन मैसेज लिखते हुए पकड़ने ही वाला होता है कि गोलू एक बेतुके, बहादुर हाथ से बीच में कूद पड़ता है, दादी को लॉग आउट कर के, और दादी को बचाने के लिए सारा इल्ज़ाम अपने ऊपर ले लेता है, कि नक़ली मानव उसने बनाया था। मानव का सारा शक अब गोलू पर आ टिकता है, और घर का थका हुआ राज़दार एक और भारी बोझ अपने कंधों पर उठा लेता है। उधर सांवी आख़िरकार हिम्मत जुटा कर तय करती है कि वो दो औरतें बन कर और नहीं जिएगी, और गोलू के हौसले के साथ वो काया बन कर अनिकेत से मिल कर पूरा सच कहने निकलती है। और जब वो मिलने की जगह पर पहुँचती है, तो काया का इंतज़ार करता जो आदमी उठ कर खड़ा होता है, वो अनिकेत ह
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नदी किनारे अनिकेत मुड़ता है और सांवी की दोनों दुनियाएँ एक ही चेहरे में ढह जाती हैं, पर पता चलता है कि अनिकेत तो कब से जानता था और चुपचाप उसके तैयार होने का इंतज़ार करता रहा। दोनों बिना नक़ाब के जुड़ते हैं, फिर भी सांवी 'तलाक़' नहीं कह पाती और अनिकेत अपनी बेटी का ज़िक्र टाल जाता है, और उधर चांचल आंटी काया की छपी प्रोफ़ाइल लहरा कर पूछ बैठती है कि ये तो हूबहू सांवी है।
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चांचल का ब्रॉडकास्ट चतुर्वेदी घर तक पहुँच जाता है और काया की प्रोफ़ाइल सांवी के अपने घर के स्क्रीन पर आ खड़ी होती है, गोलू की एक हड़बड़ी तरक़ीब उसे बाल-बाल बचाती है पर वो डर सांवी को अनिकेत से दूर धकेल देता है। उसी डर से जगदीश सरिता से सर्द हो जाता है और मानव इरा से पीछे हट जाता है, तीनों रिश्ते एक शाम में चटख़ जाते हैं। और खाने की मेज़ पर थकी दादी पुष्पा परफेक्ट रिश्ता खोल कर अपना कठपुतली खाता पूरे परिवार की आँखों से बस एक टैप की दूरी पर ला खड़ा करती हैं।
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दादी की उँगली स्क्रीन को छूने ही वाली होती है कि गोलू पानी का गिलास फ़ोन पर उलट कर और राउटर खींच कर कठपुतली खाते को एक गिलास पानी में डुबो कर बचा लेता है। पर वो बाल-बाल बचना घर के तीनों पीछे हटे रिश्तों को जमा देता है, और थका हुआ गोलू अब सबको चुपके-चुपके सच की तरफ़ धकेलने लगता है। उसी की हिम्मत से जगदीश सरिता को अपना पूरा इक़रार लिख देता है कि वो कोई कर्नल नहीं, बस अकेला डाकबाबू है, पर वो सरिता के बजाय पूरे फ़ैमिली ग्रुप में जा गिरता है और घर भर के फ़ोन बजने लगते हैं।
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जगदीश का इक़रार फ़ैमिली ग्रुप में खुला पड़ा है और सबसे पहले सांवी उसे पढ़ने की हिम्मत करती है, पर मज़ाक उड़ाने के बजाय उसे अपने पापा के शब्दों में अपना ही अकेलापन दिख जाता है। एक कोमल बाप-बेटी की मुलाक़ात में दोनों लगभग कह ही देते हैं कि वो भी उसी ऐप पर हैं, पर दोनों हिम्मत हार जाते हैं। सांवी अपने पापा को वही बहादुरी सिखाती है जो वो ख़ुद नहीं जुटा पाती, और जगदीश सरिता के घर सच बताने पहुँचता है, तभी अंदर से एक जवान आवाज़ 'माँ' कहती है और अनिकेत सामने आ खड़ा होता है, जगदीश समझ जाता है कि जिस औरत से उसे प्यार है, वो उसी लड़के की माँ है जिससे उसकी बेटी का दिल जुड़ रहा है।
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जगदीश आख़िरकार सरिता को अपना सच कह देता है कि वो कोई कर्नल नहीं, बस एक अकेला डाकबाबू है, और सरिता नरमी से अपना भी झूठ खोल देती है कि उसने भी ख़ुद को बड़ी हेडमिस्ट्रेस बता कर प्रोफ़ाइल सजाई थी, दो नक़ली लोग अपने असली रूप में एक-दूसरे से प्यार कर बैठते हैं। पर जगदीश सांवी और अनिकेत वाला बड़ा जाल अभी नहीं खोलता। उसी रात अनिकेत अपनी माँ से 'काया, या सांवी, जो भाग गई' का ज़िक्र करता है और सरिता चुपचाप जोड़ लेती है कि वो लड़की चतुर्वेदी घर की है। उधर मानव इरा को सच बताने पहुँचता है, पर कहने से पहले ही इरा बोल पड़ती है कि मुझे पहले से पता है कि हर बार तुम नहीं थे, और मुझे ये भी पता है कि वो कौन था।
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इरा मानव को बता देती है कि उसने कई हफ़्ते पहले ही ताड़ लिया था कि उसके नाम से इश्क़ लड़ाने वाला कोई नौजवान नहीं, बल्कि उसकी दादी पुष्पा थीं, और ग़ुस्सा होने के बजाय उसे वो कोशिश प्यारी लगी और वो असली, बदमिज़ाज मानव पर रीझ गई है, घर का पहला सच्चा रिश्ता। इरा के धकेलने पर मानव घर लौट कर दादी को पकड़ता है, और पुष्पा अपने अकेलेपन का सच खोलते हुए बता देती हैं कि पापा और दीदी भी उसी ऐप पर हैं, फिर काँपती उँगली से अपनी जासूसी कॉपी में एक लाइन दिखाती हैं, ऐप ने 'कर्नल रणविजय' और 'काया' को अट्ठानवे प्रतिशत का मैच बताया है और घर में किसी ने पहले ही 'रुचि है' पर टैप कर दिया है।
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पिता-बेटी वाले उस ख़तरनाक अट्ठानवे प्रतिशत मैच को सुबह होने से पहले मिटाना ज़रूरी है, तो आधी रात मानव, दादी और गोलू एक जंग की तरह जुट जाते हैं, पर पता चलता है कि पापा ने डर के मारे पासवर्ड बदल दिया है और गोलू लॉक हो गया है। पासवर्ड बूझने की हँसाने वाली कोशिश तब थमती है जब मानव धीरे से माँ का नाम 'सुमित्रा' डलवाता है और अकाउंट खुल जाता है, इतने बरसों बाद भी पापा का ताला उनकी गुज़री पत्नी का नाम है। वो 'रुचि' वापस ले कर मैच मिटा देते हैं, पर तभी स्क्रीन पर 'परफेक्ट रिश्ता संगम' का न्योता फूट पड़ता है और एक-एक कर के पता चलता है कि पापा, दीदी, नक़ली मानव, इरा, अनिकेत, सरिता, यहाँ तक कि दूरबीन वाली
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इतवार की शाम चतुर्वेदी घर एक रंगमंच बन जाता है जहाँ हर कोई एक ही संगम के लिए अलग-अलग झूठे बहाने से तैयार हो रहा है, और गोलू भेड़ों को हाँकते कुत्ते की तरह किसे किस कमरे में रखना है ये संभालता फिरता है। पापा 'डाकघर का पुनर्मिलन' बता कर नक़ली मेडल चमकाते हैं और सांवी 'केक की डिलीवरी' का बहाना बना कर बरसों बाद पहली बार सज-सँवर रही है, दोनों अंदर ही अंदर आस बाँधे कि आज वो आख़िरकार बहादुर बन जाएँगे। दरवाज़े पर बाल-बाल टकराने से बचा कर गोलू दोनों को अलग रिक्शों में रवाना करता है, फिर उसे एहसास होता है कि दोनों एक ही हॉल जा रहे हैं। और उस संगम में तक़दीर पिता-बेटी को पीठ-से-पीठ बग़ल की मेज़ों पर बिठा
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पिता और बेटी, दोनों नक़ाब में पकड़े गए, संगम की भीड़ से निकल कर एक ख़ामोश कोने में आ जाते हैं, और शर्म की जगह उनके बीच बरसों की जमी हुई बर्फ़ पिघल जाती है। जगदीश के नक़ली मेडल और सांवी की बरसों बाद लगाई लाली, दोनों एक साथ हँसी और आँसू में बदल जाते हैं, और दो अकेले लोग पहली बार एक-दूसरे को अपना पूरा सच बता देते हैं, बाप का अकेलापन और बेटी का तलाक़ का बोझ। गोलू भागता हुआ पहुँचता है, किसी तूफ़ान की उम्मीद में, और दोनों को साथ हँसते-रोते पा कर पहली बार अपना बोझ उतरता महसूस करता है। दोनों ठान लेते हैं कि आज छुपना बंद, जगदीश सरिता को ढूँढने जाता है और सांवी अनिकेत को। और नई हिम्मत के साथ फ़र्श पार क
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एक ही फ़्रेम में खड़ी चार दुनियाएँ आख़िरकार खुल कर सामने आ जाती हैं, सांवी को पता चलता है कि अनिकेत उसी सरिता का बेटा है जिसका हाथ उसके पापा ने थाम रखा है, और चारों समझ जाते हैं कि अगर बड़े शादी करें और छोटे भी, तो ये परिवार का पेड़ हँसी की एक गुत्थी बन जाएगा। बात गरमजोश और अजीब दोनों है, पर कोई साफ़ हल नहीं, क्योंकि तलाक़ का सच अब भी अधूरा लटका है, और तभी अनिकेत का अपना छुपाया हुआ ग़म एक फिसलन में झलक जाता है और सांवी को चोट पहुँचाता है कि जिस आदमी ने उसका तलाक़ सहजता से अपनाया, उसने ख़ुद एक पूरी दुनिया छुपा रखी थी। और ऐन उसी पल, पूरी शाम चुपचाप फ़ोन ताने घूमती चांचल आंटी खड़ी हो कर ऐलान करती
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चांचल का लाइव कैमरा चतुर्वेदी परिवार के हर राज़ को पूरे कानपुर के फ़ोनों तक बहा देता है, तलाक़, नक़ली कर्नल, कठपुतली चलाती दादी, सब कुछ। पर पहली बार, छुपने के बजाय, पूरा परिवार संगम के मंच पर एक साथ खड़ा हो जाता है और एक-एक कर के अपना सच ख़ुद, ज़ोर से, सबके सामने कह देता है। जगदीश मानता है कि वो कोई कर्नल नहीं, बस एक अकेला डाकबाबू है जिसे इस उम्र में प्यार हुआ, सांवी अपने तलाक़ को शर्म की जगह अपनी ताक़त बना कर अपना लेती है, और दादी पुष्पा बेशर्मी से अपनी पूरी कठपुतली-कहानी सुना कर हॉल को हँसा देती हैं, जबकि मानव और इरा साथ खड़े होते हैं। सच की ये आँधी हॉल और लाइव, दोनों को परिवार के हक़ में मो
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उसी मंच पर, उसी सच की रात में, अनिकेत अपना आख़िरी नक़ाब उतार देता है, वो एक विधुर है, और उसकी एक छह साल की बेटी अनवि है, जिसे उसने डर के मारे सबसे, और ऐप से भी, छुपा रखा था। भीड़ से दूर एक शांत कोने में वो सांवी को अपनी गुज़री पत्नी मेघा और अपने उस वादे की पूरी कहानी सुनाता है, कि वो अपनी बेटी की ज़िंदगी में किसी अधूरे प्यार को नहीं आने देगा, और यही डर उसे भी नक़ाब के पीछे ले गया था। अब सांवी के सामने वही सवाल है जो कभी अनिकेत के सामने था, क्या वो किसी की पूरी दुनिया अपना सकती है, एक बच्ची, एक गुज़री पत्नी की याद, ठीक वैसे जैसे अनिकेत ने उसका तलाक़ अपनाया था। कुछ दिन बाद सांवी पहली बार अनवि से
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सांवी अनवि के सीधे सवाल का झूठ की जगह एक सच्चा जवाब देती है, और वहीं से उस सहमी बच्ची के दिल का दरवाज़ा धीरे-धीरे खुलने लगता है, रंगों और केक और एक चित्र के सहारे। जगदीश और सरिता अपने उलझे हुए परिवार के पेड़ को हँसी-मज़ाक में सुलझा कर, सारी गुत्थी के बावजूद, एक-दूसरे को चुन लेते हैं। मानव और इरा मज़बूत हैं, और कठपुतली चलाने वाली दादी पुष्पा को एक ऐसी सज़ा मिलती है जो असल में एक आशीर्वाद बन जाती है, अब उनकी बारी है। परिवार तय करता है कि अब छुपना नहीं, तीनों रिश्तों का जश्न सब मिल कर एक साथ मनाएँगे। पर उसी जश्न की पूर्व-संध्या पर, चतुर्वेदी घर के गेट पर एक गाड़ी आ कर रुकती है, और उसमें से पुरानी
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पुरानी शर्म का आख़िरी साया, सांवी का पूर्व-पति समीर, वायरल हुई उस रात का वीडियो देख कर उसे 'वापस अपनाने' का एहसान जताने आता है, पर इस बार सांवी अकेली नहीं, पूरे परिवार के साथ खड़ी है। लड़ाई नहीं, नरमी से वो उसे शुक्रिया कह कर हमेशा के लिए विदा कर देती है, और तलाक़ की वो शर्म आख़िरकार दफ़्न हो जाती है। फिर चतुर्वेदी आँगन में तीन पीढ़ियों के तीन रिश्तों का जश्न एक साथ मनता है, और परफेक्ट रिश्ता ऐप 'तीन पीढ़ी वाले परिवार' को अपना चमत्कारी मैच बता कर फ़ीचर कर देता है, जबकि सच्चाई ये है कि रिश्ते एल्गोरिदम ने नहीं, ईमानदारी ने जोड़े। थका हुआ राज़दार गोलू आख़िरी हँसी हँसता है, और तभी दादी पुष्पा के