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अध्याय 16 / 26 पढ़ने में 14 मिनट

दबा हुआ सच

साया बनके द्वारा Avni Oberoi

रात के ग्यारह बजे थे, और आर्यन साहनी का बंगला अब उसका अपना नहीं रहा था। हर दरवाज़े पर, हर गलियारे के मोड़ पर, योहान बत्रा के आदमी खड़े थे, काले कपड़े, कानों में तार, और आँखों में वो ठंडक जो सिर्फ़ पैसे से ख़रीदी जाती है। सुहाना जानती थी, अगर उसे सच के आख़िरी टुकड़े तक पहुँचना है, तो आज रात उसे आर्यन को इस घर से बाहर निकालना होगा, बिना किसी की नज़र में आए।

"जग्गी, मुझे बीस मिनट चाहिए। सिर्फ़ बीस। गेट नंबर तीन वाले दोनों आदमियों को उलझाए रखो, जैसे भी हो। और हाँ, ज़रा ज़ोर से उलझाना। जितना बड़ा तमाशा, उतनी अच्छी आड़।"

"वाह मैडम, वाह। दस साल फ़ौज में तमग़े कमाए, और आज मेरी ड्यूटी ये है कि मैं दो पहलवानों के सामने नौटंकी करूँ। ... चलो कोई नहीं। जग्गी संधू जब नाटक करता है ना, तो फ़िल्मफ़ेयर वाले भी रो पड़ें। देखना तुम।"

और अगले ही पल, बंगले के पिछले लॉन में एक हंगामा खड़ा हो गया। जग्गी, एक ख़ाली बोतल हाथ में लिए, लड़खड़ाता हुआ, पूरे गले से एक पुराना फ़ौजी गाना गाता हुआ, सीधे योहान के दोनों गार्डों से जा टकराया।

"ओए बादशाहो! आओ, गले लग जाओ! आज जग्गी की सालगिरह है! ... कौन जग्गी? पूरी बटालियन जानती है मुझे, और तुम दो टाँगों वाले खम्बे नहीं जानते? आओ, एक जफ़्फ़ी तो बनती है!"

दोनों गार्ड उस लड़खड़ाते पहाड़ को सँभालने में उलझ गए, और ठीक उसी वक़्त, दीवार के साये में, सुहाना ने आर्यन का हाथ पकड़ा और उसे पिछले फाटक से बाहर, इंतज़ार करती एक बेनाम गाड़ी की पिछली सीट में धकेल दिया।

"तुम्हें अंदाज़ा है ना कि तुम देश के सबसे बड़े सुपरस्टार को उसके ही घर से चोरों की तरह भगा रही हो? अगर किसी ने देख लिया... ... और वैसे, कहाँ ले जा रही हो मुझे, इतनी रात को?"

"वहाँ, जहाँ बत्रा के कान नहीं पहुँचते। तुमने नौ साल एक झूठ की क़ैद में गुज़ारे हैं, आर्यन। आज रात वो क़ैद टूटेगी। पूरी की पूरी। और तुम मुझे सब बताओगे। वो सब, जो तुमने नौ साल से किसी को नहीं बताया।"

गाड़ी शहर के एक पुराने, भूले-बिसरे हिस्से में जा कर रुकी, एक टूटे-फूटे थिएटर के सामने, जिसके बोर्ड पर से रंग कब का उतर चुका था। यही वो जगह थी जहाँ नौ साल पहले तीन दोस्तों ने एक नाटक का सपना देखा था। और अंदर, एक अकेली पीली रोशनी के नीचे, इक़बाल उनका इंतज़ार कर रहा था।

"आ गए। ... जानते हो आर्यन, ये वही स्टेज है जहाँ तुमने पहली बार 'साया' का वो सीन किया था। आकाश विंग में खड़ा काँप रहा था अपने ही लफ़्ज़ों से, और तुम... तुम आग थे उस दिन। तीनों की आँखों में एक ही सपना था। ... फिर उस सपने को किसी ने ख़रीद लिया, और तुमने बेच दिया।"

और सुहाना उस ख़ाली स्टेज को देखती रह गई। यहाँ, इसी फ़र्श पर, कभी वो भी हँसी थी, जब आकाश उसे अपने संवाद सुनाया करता था। आकाश सिर्फ़ आर्यन का दोस्त नहीं था। वो उसका भी दोस्त था। उसने एक ही मौसम में अपना प्यार भी खोया था, और अपना सबसे अच्छा दोस्त भी।

"मैं भी यहीं खड़ी थी, इक़बाल सर। जिस दिन आकाश ने कहा था कि एक दिन उसका नाम इस थिएटर के बाहर बड़े अक्षरों में लिखा होगा। ... उसका नाम कहीं नहीं लिखा गया। किसी क़ब्र के पत्थर पर भी नहीं, ढंग से नहीं। मैंने उसे भी खोया, और उसे भी जिसने उसे बेचा। एक ही रात में दो जनाज़े उठे थे मेरे।"

"मैं जानता हूँ, बेटी। मैंने तीनों को अपने हाथों गढ़ा था। आकाश की क़लम, आर्यन का चेहरा, और तेरी वो चट्टान जैसी सच्चाई। तुम तीनों मिल कर एक मुकम्मल इंसान बनते थे। ... फिर एक आदमी आया, और उसने उस मुकम्मल इंसान को तीन टुकड़ों में तोड़ दिया। आज वो टुकड़े इसी कमरे में हैं। शायद इसीलिए तक़दीर तुम्हें यहाँ ले आई है।"

और कोने में, एक टूटी कुर्सी पर, मिहिर चौहान बैठा था। वो चालाक, चिकना मैनेजर आज बिखरा हुआ था, कंधे झुके, हाथ काँपते। पैसों की चोरी पकड़ी जा चुकी थी, और अब उसके पास खोने को कुछ नहीं बचा था, सिवाय उस राज़ के जिसे वो नौ साल से अपने सीने में दबाए बैठा था।

"आज यहाँ कोई सुपरस्टार नहीं है, कोई मैनेजर नहीं, कोई उस्ताद नहीं। आज यहाँ सिर्फ़ चार ज़िंदा लोग हैं और एक मरा हुआ आदमी, जिसका इंसाफ़ नौ साल से अटका है। हर कोई एक टुकड़ा जानता है। आज वो सारे टुकड़े इसी कमरे में जुड़ेंगे। मिहिर, तुमसे शुरू करते हैं। आर्यन का पैसा हर महीने कहाँ जाता है?"

"हर महीने... आर्यन के खाते से एक बड़ी रक़म निकलती है, किसी 'सलाहकार फ़ीस' के नाम पर। पर वो फ़ीस नहीं है, कैप्टन। वो चुप्पी की क़ीमत है। वो पैसा सीधे योहान बत्रा के पास जाता है। नौ साल से, एक महीना भी नागा नहीं हुआ। और मुझसे बस इतना कहा गया था कि काग़ज़ साफ़ रखूँ और मुँह बंद।"

"मैं... मैं हर महीने उसी आदमी को पैसे भेजता रहा जिसने... ... मुझे लगता था वो मेरे करियर की देखभाल की फ़ीस है। मिहिर, तुम्हें पता था? तुम्हें नौ साल से पता था कि मैं अपने ही हाथों से अपनी क़ब्र का किराया भर रहा हूँ, और तुमने मुझे एक बार भी नहीं रोका?"

"मुझे ब्लैकमेल किया गया था, आर्यन। उस रात के बारे में चुप रहने के लिए। मैंने अपनी आँखों से कुछ नहीं देखा था, पर मैं इतना जानता था कि उस लड़के की मौत में कुछ सही नहीं था। और जिस दिन मैंने एक सवाल पूछा, बत्रा के आदमी ने मेरी बेटी के स्कूल का पता एक पर्ची पर लिख कर मेरी मेज़ पर रख दिया। बस। उसके बाद मैंने कभी दोबारा मुँह नहीं खोला।"

सुहाना ने आर्यन की तरफ़ देखा। अब बारी उसकी थी। वो टुकड़ा, जो सिर्फ़ वही जानता था। नौ साल का सबसे भारी, सबसे गंदा सच, जिसे उसने आज तक अपनी साँसों के नीचे दबा रखा था। इक़बाल ने धीरे से, बहुत नरमी से कहा।

"कह दो, बेटा। जो उस रात हुआ। मैंने आधा देखा है, आधा जोड़ा है। पर पूरा सच सिर्फ़ तुम्हारे सीने में बंद है। नौ साल तुमने इसे एक पत्थर की तरह ढोया है। आज उतार दो। इसी स्टेज पर, जहाँ से ये सब शुरू हुआ था। आकाश की रूह इसी की मुंतज़िर है।"

"'साया' आकाश की जान थी। और योहान बत्रा को वही जान चाहिए थी। उसने कहा था, स्क्रिप्ट मुझे दो, चेहरा आर्यन का लगाओ, और आकाश का नाम हर काग़ज़ से मिटा दो। जैसे उसने ये कभी लिखा ही न हो। ... आकाश ने साफ़ मना कर दिया। उसने बत्रा की आँखों में देख कर कहा, ये मेरी रूह है, बत्रा साहब। रूह बिकती नहीं।"

आर्यन की आवाज़ अब काँप रही थी, और सुहाना को लगा जैसे थिएटर की टूटी दीवारें पीछे हट गई हों, और वो चारों उसी नौ साल पुरानी रात में जा खड़े हुए हों, जहाँ एक चिराग़ बुझने वाला था।

"उस रात मैं वहाँ था, सुहाना। उसी कमरे में। मैंने अपनी आँखों से देखा कि बत्रा के आदमी ने आकाश को... ... मैंने चीख कर कहा था, रोको! ये ग़लत है! मैंने आगे बढ़ कर उसका हाथ पकड़ा था। और फिर उन्होंने मुझे मारा, फ़र्श पर गिरा दिया, और बत्रा मेरे ऊपर झुक कर, बड़ी नरमी से बोला, अब दो ही रास्ते हैं, बेटा। या तो तू सितारा बनेगा, या तू भी इसी के साथ जाएगा।"

"और मैं डर गया, सुहाना। जवान था, फिर भी डर गया। मैंने वो लॉन्च ले लिया, 'परछाईं' पर अपना चेहरा लगा लिया, और दुनिया को यक़ीन दिला दिया कि आकाश एक नाकाम लड़का था जिसने ख़ुदकुशी कर ली। और तुम्हें मैंने इसलिए छोड़ा, क्योंकि तुम्हारी आँखें झूठ पकड़ लेतीं। तुम एक ही नज़र में जान जातीं कि मैंने क्या बेच दिया है।"

और नौ साल की सारी नफ़रत, जो सुहाना ने पत्थर बना कर सीने में रखी थी, एक पल को हिल गई। उसने सोचा था वो एक बुज़दिल के सामने खड़ी है। पर इस आदमी ने चीख कर 'रोको' कहा था, इसने आकाश का हाथ पकड़ा था, और बदले में इसने मार खाई थी। फिर भी... फिर भी इसने नौ साल की चुप्पी चुनी थी। और वो चुप्पी अब भी उन दोनों के बीच एक दीवार बन कर खड़ी थी।

"तुमने उस रात एक बार 'रोको' कहा, आर्यन। सिर्फ़ एक बार। और फिर नौ साल तक तुमने कुछ नहीं कहा। आकाश की माँ इस दुनिया से ये मान कर गई कि उसके बेटे ने ख़ुद अपनी जान ली। ये जो एक आँसू आज तुम्हारी आँख में तैर रहा है ना, ये उस एक 'रोको' के लिए है, या उन नौ साल की ख़ामोशी के लिए?"

"दोनों के लिए, सुहाना। दोनों के लिए। मैं हर रात उस लड़के का चेहरा देखता हूँ जब आँखें बंद करता हूँ। हर पुरस्कार जो मुझे मिला, हर तालियाँ जो मेरे नाम पर बजीं, वो सब आकाश की चुराई हुई आवाज़ पर बजी हैं। मैं सुपरस्टार नहीं हूँ, सुहाना। मैं एक क़ब्र हूँ, जिस पर लोग सजी-धजी तस्वीरें खिंचवाते हैं।"

और तभी सुहाना ने उस दूरी को महसूस किया जो वो नौ साल से बड़ी मेहनत से बनाए हुए थी, और जो अब सिर्फ़ एक साँस भर की रह गई थी। उसका हाथ, अपने आप, आर्यन के काँपते हाथ की तरफ़ उठा। थिएटर की वो अकेली पीली रोशनी उन दोनों के बीच काँप रही थी, और नौ साल की आग एक बार फिर उस पुराने स्टेज पर सुलग उठी।

"नहीं। ... अभी नहीं, आर्यन। अगर मैंने अभी तुम्हें छू लिया, तो मैं वो कैप्टन नहीं रहूँगी जिसे आकाश का इंसाफ़ चाहिए। और अगर मैं वो नहीं रही, तो हम दोनों उस रात मारे जाएँगे। इसलिए ये आँसू पोंछो, और मुझे एक जवाब दो। इल्ज़ाम काफ़ी नहीं होते, आर्यन। बत्रा को बर्बाद करने के लिए, हमारे पास सबूत क्या है?"

कमरे में एक भारी ख़ामोशी छाई। और फिर मिहिर ने, जो अब तक कोने में सिकुड़ा बैठा था, बहुत धीरे से सिर उठाया। उसके चेहरे पर एक अजीब सा डर था, उस आदमी का डर जो एक ऐसा राज़ खोलने जा रहा है जिसे जानने वाले अक्सर ज़्यादा दिन ज़िंदा नहीं रहते।

"सबूत है, कैप्टन। ... बत्रा हर आदमी को एक ज़ंजीर से बाँधता है, और वो ज़ंजीर होती है सबूत, जो वो ख़ुद जमा करता है। मैंने एक बार, सिर्फ़ एक बार, उसका वो कमरा देखा है। एक तिजोरी। उसमें हर उस इंसान की गंदगी बंद है जिसे उसने कभी ख़रीदा। और उसमें... उसमें उस रात की एक रिकॉर्डिंग भी है।"

"रिकॉर्डिंग? किस रात की? क्या मतलब है तुम्हारा, मिहिर?"

"उसी रात की, आर्यन। बत्रा ने अपने ही आदमियों को फ़िल्माया था। आकाश का वो इनकार, वो सब कुछ जो उसके बाद हुआ... एक-एक पल। वो उसका सबसे बड़ा हथियार है, ताकि तुम में से कोई कभी मुँह न खोले। पर वही उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी भी है। क्योंकि उस एक रिकॉर्डिंग में ख़ुदकुशी नहीं है, कैप्टन। उसमें एक ठहरा हुआ, ठंडे दिमाग़ का क़त्ल है।"

"तो वो रिकॉर्डिंग कहाँ है, मिहिर? वो तिजोरी किस जगह है? साफ़-साफ़ बताओ, क्योंकि उस एक चीज़ पर आकाश का इंसाफ़ और आर्यन की जान, दोनों टिकी हैं।"

और मिहिर ने जो जवाब दिया, उसने उस पूरे थिएटर की हवा जमा दी।

"उसकी अपनी निजी तिजोरी में, कैप्टन। और वो तिजोरी उसी इमारत की सबसे ऊपरी मंज़िल पर है जहाँ तीन दिन बाद आर्यन की फ़िल्म 'आग़ाज़' का प्रीमियर है। वो पूरा ऑडिटोरियम बत्रा का अपना है, ऊपर उसका निजी दफ़्तर, और उसी दफ़्तर की दीवार में वो तिजोरी। जिस रात हम बत्रा को पकड़ना चाहते हैं, ठीक उसी रात, उसी छत के नीचे, उसका इकलौता सबूत बंद पड़ा होगा।"

और सुहाना के दिमाग़ में एक ही पल में सारा नक़्शा खिंच गया। वो सबूत, जो योहान बत्रा को फाँसी के फंदे तक पहुँचा सकता था, इस पूरी दुनिया में उसकी सिर्फ़ एक कॉपी थी। और वो कॉपी ठीक उसी क़िले के भीतर बंद थी जिसे बत्रा ने अपनी पूरी फ़ौज से घेर रखा था। जिस रात उसे आर्यन को ज़िंदा रखना था, उसी रात उसे उस क़िले में सेंध लगानी थी।

"यानी हमें बत्रा को उसी की माँद में जा कर हराना होगा। जिस रात उसके सारे आदमी वहाँ मौजूद होंगे। जिस रात मुझे उसी मंच पर वो पर्ची पढ़नी है जो वो ख़ुद मेरे हाथ में थमाएगा। ये तो नामुमकिन है, सुहाना।"

"नामुमकिन तो ये भी था, बेटा, कि नौ साल बाद ये तीन टुकड़े एक ही कमरे में लौट आएँ। पर देखो, लौट आए हैं। ... आकाश ने अपना नाटक 'साया' कहा था, वो साया जो रोशनी के बिना ज़िंदा नहीं रहता। शायद अब वक़्त है कि साया रोशनी में आए। पर सँभल कर, सुहाना। जो आदमी एक क़त्ल को फ़िल्मा कर तिजोरी में रखता है, वो हर चाल पहले से जानता है।"

और सुहाना उस टूटे स्टेज पर चुपचाप खड़ी रही, पर उसके भीतर एक फ़ौजी दिमाग़ आग की तरह जल रहा था। तीन काम, एक रात। आर्यन को नौ बजकर चालीस के वार से बचाना, उस साये को ज़िंदा पकड़ना, और उस तिजोरी से वो रिकॉर्डिंग निकालना। और इन तीनों के बीच, हर दरवाज़े पर, योहान बत्रा का पहरा।

"सुनो, आर्यन। नौ साल तुमने डर के आगे घुटने टेके। अब सिर्फ़ तीन दिन बचे हैं। उस रात, या तो हम आकाश का इंसाफ़ बाहर निकाल लाएँगे, या हम तीनों उसी छत के नीचे दफ़न हो जाएँगे। और मैं तुमसे एक वादा माँगती हूँ। उस रात, जो भी हो जाए, तुम अपने डर के आगे नहीं झुकोगे।"

"मैंने नौ साल पहले एक बार 'रोको' कहा था, और चुप हो गया, सुहाना। ... इस बार अगर मैंने कहा, तो मैं चुप नहीं रहूँगा। चाहे इसकी क़ीमत मेरी जान हो, या मेरी शोहरत। तुमसे वादा।"

और उस अकेली पीली रोशनी में, चार लोगों ने पहली बार एक-दूसरे की आँखों में देखा, अजनबियों की तरह नहीं, एक ही ज़ख़्म के चार गवाहों की तरह। नौ साल का दबा हुआ सच अब चारों के सामने पूरा खुला पड़ा था। और उस सच को क़ब्र से बाहर निकालने का सिर्फ़ एक रास्ता था, और वो रास्ता सीधे शैतान की माँद से हो कर जाता था।

एक तरफ़ वो रिकॉर्डिंग थी, जो बत्रा की पूरी सल्तनत को राख कर सकती थी। दूसरी तरफ़ वो सच, जिसने सुहाना की रीढ़ में बर्फ़ भर दी। उस सबूत की इकलौती कॉपी उसी आदमी की तिजोरी में बंद थी, जिसका वो गला घोंटता था। उसी छत के नीचे, उसी रात, जहाँ आर्यन को नौ बजकर चालीस मिनट पर मरना था। ... शिकार और सबूत, दोनों अब एक ही जाल में थे, और उस जाल का ताला, ख़ुद शिकारी की जेब में था।

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साया बनके