अध्याय 22 / 25 पढ़ने में 12 मिनट
आख़िरी चाल
लास्ट बेंच वाला द्वारा Avni Oberoi
जाँच सभा में हारने के बाद, नागपाल रातों-रात अपनी आख़िरी चाल चलता है, वकील, ख़रीदे हुए गवाह, और धमकियाँ, ताकि सुबह होने से पहले सारे सबूत राख हो जाएँ और सब चुप हो जाएँ, और रोशनी तथा नित्या पर मँडराता ख़तरा सच बन जाता है। नित्या के पास अब सिर्फ़ एक ही रास्ता है, वो लड़की जिससे उसे सबसे ज़्यादा नफ़रत करनी चाहिए थी, सान्या। अपने डूबे हुए घर और नागपाल के ख़रीदे कर्ज़ के बोझ तले दबी सान्या आख़िरकार अपने ज़मीर का सामना करती है और सही चुनती है, वो सारे सबूत जो उसने नित्या के ख़िलाफ़ जमा किए थे, नागपाल की तरफ़ मोड़ देती है। शीशे की मीनार की अँधेरी सबसे ऊँची मंज़िल पर, जहाँ पिता का नाम साफ़ करने वाली फ़
रात का पूरा शहर सो रहा था। पर शीशे की मीनार की सबसे ऊँची मंज़िल पर बत्तियाँ जल रही थीं। नागपाल आज नहीं सोया था। वो काम कर रहा था। जाँच सभा में जो हार उसे मिली थी, उसका जवाब वो एक ही रात में लिख देना चाहता था। एक आख़िरी चाल, जो सुबह होने से पहले पूरी होनी थी।
उसके दफ़्तर में वकीलों की एक टोली बैठी थी, मेज़ पर हलफ़नामों का ढेर, और कोने में कुछ लोग, ख़रीदे हुए गवाह, जो सुबह अदालत में क़सम खा कर कहने वाले थे कि कियान के सारे काग़ज़ जाली हैं और देवनाथ मास्टर सच में चोर था। और दरवाज़े पर, नागपाल के आदमी। सब कुछ नाप-तौल कर, ठंडे दिमाग़ से रचा जा रहा था।
"सुबह होने तक कोई सबूत नहीं बचेगा। कोई गवाह नहीं। ... वो असली फ़ाइल, जो बारह साल से मेरी तिजोरी में है, आज रात राख हो जाएगी। उसके बिना, उनका दोबारा खुला केस एक ख़ाली डिब्बा है। ... और वो दोनों लड़कियाँ, वो टॉपर और वो बच्ची, दोनों समझ जाएँगी कि नागपाल से लड़ने का अंजाम क्या होता है।"
और अपनी उसी रात की चाल में, नागपाल ने एक फ़ोन उस छोटे से शहर में भी लगवाया, जहाँ नित्या की विधवा माँ अकेली रहती थी। एक धीमी, मीठी धमकी, कि आपकी बेटी बड़े लोगों के मामलों में हाथ डाल रही है, और ऐसे मामलों में अकेली माँओं का बहुत नुक़सान होता है। नित्या की पूरी दुनिया, उसकी माँ, अब सीधे नागपाल की ज़द में थी।
और यही उसकी सबसे ज़ालिम चाल थी। दोबारा खुला केस, गवाहियाँ, कैमरे, सब बेकार थे, अगर सुबह तक वो अकेली फ़ाइल जल जाती जो देवनाथ मास्टर को बेगुनाह साबित कर सकती थी। नागपाल सबूत से नहीं, वक़्त से लड़ रहा था। और वक़्त उसके साथ था।
और उसी वक़्त, शहर के दूसरे कोने में, नित्या इस पूरे जाल को समझ चुकी थी। कियान अब भी हिरासत में था, कल की सभा के बाद उसकी ज़मानत की कार्रवाई सुबह होनी थी। पर सुबह तक शायद बहुत देर हो जाती। ये लड़ाई आज रात लड़नी थी, और कियान के बिना।
"अगर वो असली फ़ाइल जल गई, तो कियान के पापा हमेशा के लिए चोर रह जाएँगे। ... कैमरे, गवाहियाँ, सब धरे रह जाएँगे। और नागपाल आज रात रोशनी को भी उठा रहा है, उसे बच्ची को हथियार बनाना है। ... मुझे उस मीनार के अंदर पहुँचना होगा। पर अंदर की पहुँच सिर्फ़ एक इंसान के पास है।"
"अभी माँ का फ़ोन आया था, रोती हुई। ... किसी ने उसे धमकाया, मेरे बारे में। ... उस अकेली औरत ने ज़िंदगी भर सिर झुका कर, भूखे रह कर मुझे पढ़ाया, और आज नागपाल का हाथ उस तक भी पहुँच गया। ... बस, बहुत हुआ। अब मैं डरूँगी नहीं। आज रात मैं लड़ूँगी, चाहे मुझे उस आदमी से हाथ मिलाना पड़े जिससे मैं सबसे ज़्यादा नफ़रत करती हूँ।"
और वो इंसान वो आख़िरी शख़्स थी जिससे नित्या कभी मदद माँगना चाहती। सान्या। वही सान्या, जो नागपाल के लिए जासूसी करती थी, जिसने कियान के बनाए नंबर सबके सामने खोले थे, जिसे नित्या के गिरने से ही उसका अपना वज़ीफ़ा मिलना था। नित्या की सबसे बड़ी दुश्मन।
नित्या ने उसे हॉस्टल के अँधेरे गलियारे में पाया, अकेली, खिड़की के पास खड़ी। एक पल को दोनों कुछ नहीं बोलीं। बारह हफ़्तों की सारी दुश्मनी, सारी होड़, दोनों के बीच एक दीवार बन कर खड़ी थी।
"सान्या, मुझे तुमसे नफ़रत करने का पूरा हक़ है। और तुम्हें मुझसे। ... पर आज रात मैं वो हक़ छोड़ रही हूँ। ... नागपाल एक दस साल की बच्ची को उठा रहा है, और वो सबूत जला रहा है जो एक बेगुनाह मरे हुए आदमी का नाम साफ़ कर सकता है। तुम्हारे पास उसके अंदर की पहुँच है। ... और मेरे पास तुम्हारे सिवा कोई नहीं।"
"तुम्हें पता है मैंने ये सब क्यों किया, नित्या? ... ठीक उसी वजह से जिस वजह से तुम अपनी माँ के लिए लड़ती हो। मेरा भी एक घर है, जो मेरे एक नंबर पर टिका है। पापा की बीमारी, छोटे भाई की पढ़ाई, सब। ... नागपाल ने मेरे घर का कर्ज़ ख़रीद लिया था। मैं भी बिकी हुई हूँ, नित्या। तुमसे कोई अलग नहीं।"
और पहली बार, नित्या को अपनी सबसे बड़ी दुश्मन में कोई दुश्मन नहीं दिखी। उसे एक आईना दिखा। एक और घिरी हुई लड़की, जो उसी मशीन के हाथ बिकी थी जिसने नित्या को कियान से बाँधा था। दोनों एक ही डर की बेटियाँ थीं।
"तो फिर तुम मुझसे अलग नहीं हो, सान्या। हम दोनों उसी एक आदमी के हाथ की मोहरें हैं। ... फ़र्क़ सिर्फ़ इतना हो सकता है कि आज रात एक मोहरा पलट जाए। ... तुमने अब तक जो किया, चलो माफ़। पर आज तुम एक बच्ची को बचा सकती हो। सोचो, कल सुबह जब तुम आईने में देखोगी, तुम किसे देखना चाहती हो। नागपाल की जासूस को, या उस लड़की को जिसने ठीक वक़्त पर सही चुना?"
और सान्या के चेहरे पर एक तूफ़ान चला। बारह हफ़्तों की होड़, सारा डर, सारा कर्ज़, सारी वो रातें जब उसने ख़ुद से नज़र नहीं मिला पाई थी। नागपाल ने उसे एक हथियार समझा था। पर हथियार भी, कभी-कभी, उस हाथ के ख़िलाफ़ मुड़ जाते हैं जो उन्हें चलाता है।
"मैंने नागपाल के लिए जासूसी की, नित्या। ... पर मैंने एक काम चुपके से अपने लिए भी किया। उसने मुझसे जो-जो कराया, हर काम की एक नक़ल मैंने रख ली। डर के मारे। शायद अंदर से मुझे पता था कि एक दिन मुझे इसी से ख़ुद को बचाना पड़ेगा। ... और मुझे पता है वो फ़ाइल आज रात कहाँ जलेगी। उसके अपने दफ़्तर में।"
और नित्या को उस पल समझ आया कि सान्या ने वो नक़लें डर से नहीं, किसी गहरी, दबी हुई उम्मीद से रखी थीं। हर बिकी हुई ज़मीर के किसी न किसी कोने में एक छोटा सा हिस्सा बचा रहता है, जो वापस ख़रीदा जाना चाहता है। सान्या का वो हिस्सा आज रात, आख़िरकार, जाग उठा था।
और यूँ, बारह हफ़्तों की दो जानी दुश्मन, एक रात के लिए, एक टीम बन गईं। एक जो कभी बिकी थी, एक जो कभी नहीं बिकी। दोनों अँधेरे में, उसी शीशे की मीनार की तरफ़ निकल पड़ीं, जिसके सबसे ऊँचे कमरे में एक फ़ाइल और एक बच्ची, दोनों नागपाल के हाथ में थीं।
सान्या का पुराना पास अब भी काम कर रहा था। लिफ़्ट की जगह उन्होंने वही बग़ल वाली सीढ़ी चुनी जिसका ज़िक्र कभी कियान ने किया था, वो सीढ़ी जिस पर कैमरा नहीं था। हर मंज़िल के साथ नित्या का दिल तेज़ होता गया। ऊपर, उस सबसे ऊँचे कमरे में, एक बच्ची थी, एक फ़ाइल थी, और बारह साल पुरानी एक सच्चाई, जो जलने में बस कुछ ही मिनट दूर थी।
उधर, तंग किराए के कमरे में, नागपाल के दो आदमी दरवाज़े पर आ खड़े हुए थे। मीठी आवाज़ में, वो रोशनी को कह रहे थे कि उसका भाई मुसीबत में है, और वो उसे एक सुरक्षित जगह ले जाने आए हैं। पर रोशनी अपने पिता की बेटी थी, और वो झूठ पहचानती थी।
"मैं कहीं नहीं जाऊँगी। ... मेरा भाई कह कर गया था कि किसी अजनबी के साथ दरवाज़ा मत खोलना। ... और आप लोगों की मुस्कान झूठी है। अच्छे लोग इतना मीठा नहीं बोलते। ... दीदी! नित्या दीदी!"
पर एक दस साल की बच्ची दो आदमियों से कब तक लड़ती। उन्होंने उसे उठाया और गाड़ी में डाल दिया, उसी मीनार की तरफ़, जहाँ नागपाल उसे अपनी आख़िरी चाल का आख़िरी मोहरा बनाने वाला था। ख़तरा अब कोई धमकी नहीं रह गया था। वो सच हो चुका था।
और आधी रात के बाद, नित्या और सान्या मीनार की सबसे ऊँची मंज़िल पर पहुँचीं। सान्या की पहुँच उन्हें अंदर ले आई। और वहाँ, नागपाल के उसी चौड़े दफ़्तर में, दो चीज़ें उनका इंतज़ार कर रही थीं। एक कोने में, डरी हुई रोशनी, एक आदमी की पकड़ में। और मेज़ पर, एक धातु का टोकरा, एक लाइटर, और वो पुरानी, पीली फ़ाइल, जो जलने ही वाली थी।
"आ गईं। ... दोनों। एक जो बिक गई थी, और एक जो कभी बिकी नहीं। ... पर देर कर दी, लड़कियों। ... देखो, ये रही तुम्हारी सच्चाई। बारह साल पुरानी। एक ईमानदार आदमी को चोर बनाने वाला अकेला काग़ज़। और मेरे हाथ में एक लाइटर।"
"रुको! ... नागपाल, रोशनी को छोड़ दो। वो एक बच्ची है, इसका इस लड़ाई से कोई लेना-देना नहीं। ... तुम्हें जो चाहिए मुझसे लो, पर उसे जाने दो।"
"सौदा सुनो। ... तुम दोनों अदालत में क़सम खाओगी कि कियान के सारे सबूत जाली थे, कि तुमने ख़ुद उन्हें गढ़ा। ... इसके बदले, बच्ची घर चली जाएगी, और तुम्हारा वज़ीफ़ा भी बचा रहेगा। ... और अगर नहीं, तो ये फ़ाइल राख हो जाएगी, और ये बच्ची किसी ऐसे यतीमख़ाने में, जहाँ से इसे कोई कभी ढूँढ नहीं पाएगा। ... मैंने हर दरवाज़ा बंद कर दिया है।"
"मैं झूठी क़सम नहीं खाऊँगी, नागपाल। ... मेरी माँ ने मुझे भूखे रह कर पाला, पर एक दिन झूठ नहीं सिखाया। ... तुम मेरा वज़ीफ़ा ले लो, मेरा भविष्य ले लो। पर मेरी ज़बान नहीं ख़रीद सकते। ... कियान के पापा ने एक बार सच के लिए सब कुछ खोया था, और आज मैं भी वही करूँगी।"
"हर दरवाज़ा नहीं, नागपाल। ... एक खुला रह गया। मैं। ... तुमने मुझसे जो-जो कराया, हर रसीद, हर पैग़ाम, हर हुक्म, सबकी नक़ल मेरे पास है। और आज शाम, यहाँ आने से पहले, मैंने वो सब कुछ शिक्षा बोर्ड और तीन अख़बारों को भेज दिया। ... तुम एक फ़ाइल जला सकते हो। पर अब तुम सच नहीं जला सकते। वो शहर के बाहर निकल चुका है।"
और पहली बार उस रात, नागपाल का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। उसका पूरा हिसाब, हर बंद दरवाज़ा, एक लड़की की उस चुपचाप रखी नक़ल पर आ कर ढह गया, जिसे उसने कभी एक कमज़ोर, बिकाऊ मोहरा समझा था। उसकी चाल उलट चुकी थी।
"तुमने मुझे बरसों एक कमज़ोर, डरी हुई लड़की समझा, नागपाल। ... और शायद मैं थी भी। पर तुमने एक बात नहीं समझी। डरा हुआ इंसान सबसे ख़तरनाक तब होता है, जब उसके पास खोने को कुछ नहीं बचता। ... तुमने मेरा घर, मेरा ज़मीर, सब गिरवी रख लिया था। आज मैंने वो सब वापस ख़रीद लिया, एक ही चाल में।"
"तुमने... तुमने क्या किया? ... तू, एक बिकी हुई लड़की, तूने मेरे साथ ये किया? ... ठीक है। अगर सब कुछ डूबना ही है, तो ये फ़ाइल भी मेरे साथ डूबेगी। कम से कम देवनाथ का नाम तो हमेशा के लिए चोर रहेगा!"
और नागपाल ने लाइटर की चिंगारी फ़ाइल के कोने से लगा दी। सब कुछ एक साथ हुआ। नित्या रोशनी की तरफ़ लपकी। सान्या फ़ाइल की तरफ़। नागपाल का आदमी बीच में आया। रोशनी अपने पकड़ने वाले के हाथ में दाँत गड़ा कर छूट भागी। और उस चौड़े कमरे में, अचानक, हर कोई हर किसी की तरफ़ दौड़ पड़ा।
"रोशनी! ... इधर आ, मेरे पीछे छुप जा, जल्दी! ... देखा, मैंने कहा था न, तेरा भाई और मैं तुझे कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे। ... आँखें बंद कर, बच्ची, और मेरा हाथ मत छोड़ना!"
"दीदी, फ़ाइल! ... फ़ाइल जल रही है! ... उसे बचाओ, दीदी, वो मेरे पापा का नाम है!"
नागपाल अब वो ठंडा बादशाह नहीं रहा था। वो एक घिरा हुआ, टूटता हुआ आदमी था, जो अपनी पूरी सल्तनत को एक जलते हुए काग़ज़ में बदलते देख रहा था। उसने आख़िरी बार उस अधजली फ़ाइल की तरफ़ छलांग लगाई, जैसे कोई डूबता आदमी आख़िरी तिनके की तरफ़ लपकता है।
"मेरे पास है! ... आग बुझाओ, नित्या, बस काग़ज़ बचा लो, नागपाल को जाने दो! ... रोशनी, इधर आ, मेरे पीछे!"
सान्या ने जलती फ़ाइल को अपने दुपट्टे में लपेट कर आग बुझाने की कोशिश की। धुआँ उठा, चिंगारियाँ बिखरीं। नित्या एक हाथ से रोशनी को सीने से चिपकाए, दूसरे हाथ से सान्या की तरफ़ बढ़ी। और नागपाल, अपनी पूरी बची-खुची ताक़त से, उस काग़ज़ को छीनने के लिए झपटा। तीन लड़कियाँ और एक टूटता हुआ आदमी, सब एक ही अधजले काग़ज़ के इर्द-गिर्द उलझ गए।
जलती फ़ाइल सान्या के हाथ में थी, आधी आग, आधी बची। नागपाल ने उसे छीनने के लिए हाथ बढ़ाया। किसी का धक्का मेज़ से टकराया, धातु का भारी टोकरा गिरा, और उसी झटके में किसी का हाथ दीवार के बड़े पैनल से जा लगा। पूरी मंज़िल की बत्तियाँ एक साथ बुझ गईं। अँधेरा।
और उस घने अँधेरे में, एक के बाद एक, तीन आवाज़ें उठीं। पहले, कुछ भारी गिरने का ज़ोरदार धमाका। फिर, आग का अलार्म, पूरी मीनार में चीख़ता हुआ। और फिर, सबसे आख़िर में, एक चीख। एक इंसानी चीख, जो अँधेरे में उठी और अचानक कट गई। बारह साल पुरानी सच्चाई वाली वो फ़ाइल, और एक ज़िंदगी, दोनों उस पल एक धागे से लटक रही थीं। और उस काली मंज़िल पर, कोई नहीं जानता था, कि उस अँधेरे में किसे चोट लगी है।
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