रेडियो सेहर की मशहूर नाइट होस्ट आरजे सितारा की रातें अकेले दिलों के नाम होती हैं, जब तक एक अजनबी ठीक दो बजे फ़ोन नहीं करता। उसका नाम वो नहीं बताता, बस एक बात कहता है, सात महीने पहले जिस कोचिंग स्टूडेंट की मौत को शहर ख़ुदकुशी मान कर भूल गया, वो ख़ुदकुशी नहीं थी। सच की तलाश में सितारा अपने शो को एक छुपी हुई जाँच बना देती है, जिसे पूरा सोता हुआ शहर सुनता है। पर उसे जल्द एहसास होता है कि वो लड़की वही थी जिसकी आख़िरी कॉल उसने एक रात अनसुनी कर दी थी। फ़ोन पर की वो आवाज़, दफ़्तर में बैठा वो अजनबी बॉस जो उसका शो बंद करने आया है, और एक ताक़तवर आदमी जिसने सच को दफ़ना दिया, तीनों उसे अलग अलग दिशाओं में खींचते हैं।
विषय-सूची
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हमारी मुलाक़ात होती है आरजे सितारा से और उसके शो से, जो शहर के जागते हुए दिलों का साथी है, गर्म, मज़ाकिया और थोड़ा अकेला। नाइट शो चुपचाप बंद होने की कगार पर है। फिर, ठीक दो बजे, एक अजनबी फ़ोन करता है, जिसकी आवाज़ भारी है और जो अपना नाम नहीं बताता। वो पूछता है कि क्या उसे वो लड़की याद है जो आख़िरी बार उसके शो पे रोई थी। अंत में वो कहता है कि वो ख़ुदकुशी नहीं थी, और फिर धीरे से, सो मत जाना सितारा।
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उस रात सितारा सो नहीं पाई। सुबह स्टेशन पर पता चलता है कि दो बजे वाली कॉल का क्लिप शहर में फैल रहा है, और चिंटू उस नंबर को ट्रेस करने की नाकाम कोशिश करता है। तभी मुंबई से नया Programming Head कबीर मेहरा आ जाता है, एक महीने में नाइट शो बंद करने का फ़रमान लेकर। उनकी पहली टक्कर तीखी और मज़ेदार है। शो बचाने के लिए सितारा चुपके से उस अजनबी के दावे को ढूँढने का फ़ैसला करती है, पर असली वजह उसका अपना अपराधबोध है। अंत में वो स्टेशन का कॉल आर्काइव खोलती है, और आख़िरी रोने वाली लड़की का वक़्त उस रात से मिल जाता है जिसे वो महीनों से याद नहीं करना चाहती।
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सितारा उस रात की रिकॉर्डिंग सुनती है जिसे वो याद नहीं करना चाहती थी। फ़ोन पर एक डरी हुई लड़की है जो ख़ुद को सिर्फ़ गुड़िया कहती है, कहती है कि उसने अपनी कोचिंग में कुछ देख लिया है और सर उसे बर्बाद कर देंगे। उसी रात सितारा ने उसे टाल दिया था, और कभी वापस नहीं लौटी। यही उसका सबसे गहरा घाव बन जाता है। अगली रात वो on air उस अजनबी के लिए एक छुपा हुआ संदेश छोड़ती है, और वो फ़ोन करता है।
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चिंटू गुड़िया का असली नाम ढूँढ निकालता है, मेहक तोमर, और एक चौंकाने वाली बात, वो मरने से कुछ महीने पहले रेडियो सेहर में intern रह चुकी थी। उस रात सितारा अपने शो को एक छुपी हुई जाँच बना देती है, और कोचिंग के डरे हुए बच्चे अपने डर उँडेल देते हैं। कबीर भड़क उठता है, पर मेहक का नाम सुनते ही उसका रंग उड़ जाता है। तूफ़ान में फँसे दोनों के बीच एक चार्ज्ड पल आता है, और अंत में सितारा को मेहक की intern फ़ाइल में emergency contact मिलता है, के. मेहरा।
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सितारा अब जानती है कि कबीर मेहक का emergency contact था, और वो उसे कुरेदती है, पर कबीर टाल जाता है। उस रात अजनबी पहला पक्का सुराग़ देता है, एक टॉपर जो कभी था ही नहीं। सितारा और चिंटू उस झूठे रैंक के पीछे लग जाते हैं। तीन बजे एक शांत पल में कबीर थोड़ा खुलता है और लगभग बता देता है कि वो कौन है। अंत में वर्धन क्लासेस का एक चिकना आदमी शो के लिए एक बड़ा sponsorship और एक नरम धमकी लेकर आता है, कुछ कहानियाँ adult नहीं होतीं, बस ख़तरनाक होती हैं।
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स्पॉन्सरशिप एक पट्टा है, और कबीर चाहता है कि सितारा उसे ले ले, क्योंकि वो उसे बचाना चाहता है, पर सितारा को इसमें कवर-अप की बू आती है। फिर डीडी सर ख़ुद आते हैं, पूरी गर्मजोशी और दानवीरता और छुपी हुई धमकी के साथ, मंत्रियों के नाम गिराते हुए। सितारा हार नहीं मानती और on air एक छुपा हुआ संदेश देती है जो उन्हें हिला देता है। अंत में उस रात अजनबी फ़ोन नहीं करता। एक और आवाज़ करती है। सितारा जी, सो जाइए। हमेशा के लिए।
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जान की धमकी सब बदल देती है। सितारा के लिए डरा हुआ कबीर आख़िरकार अपनी दीवार गिरा देता है, वो मेहक का सौतेला भाई है, जो उसकी मौत की जाँच करने अंदर से इस शहर आया था। दुश्मन साथी बन जाते हैं, और दोनों के बीच कुछ ऐसा उभरता है जिसे कोई नाम नहीं देता। पर उसने ये हफ़्तों छुपाया, और उस रात अजनबी, सतर्क या जलते हुए, उसे चेतावनी देता है कि अपने दफ़्तर वाले आदमी पर भरोसा मत करना। अंत में अजनबी एक ऐसी बात कह जाता है जो सिर्फ़ मेहक का क़ातिल या उससे प्यार करने वाला ही जान सकता था। आप उसके कौन थे?
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आवाज़ और चेहरा सबसे ज़्यादा यहाँ खींचते हैं, फ़ोन वाला ग़मगीन अजनबी, और साथ खड़ा असली आदमी। अजनबी की पहेलियों के सहारे सितारा और कबीर मेहक के छुपाए सबूतों के निशान तक पहुँचते हैं, और पाते हैं कि साज़िश एक झूठे रैंक से कहीं बड़ी है, एक पेपर-लीक का धंधा, जिसके नीचे एक पुरानी मौत दबी है। अंत में वो सबूत तक पहुँचते हैं, पर वो एक जाल है। फ़िक्सर उन्हें घेर लेता है और वो मुश्किल से बच पाते हैं, और क़त्ल साबित करने वाला इकलौता टुकड़ा अब भी सिर्फ़ अजनबी के पास है।
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आख़िरी सबूत के लिए आवाज़ को आख़िरकार एक चेहरा बनना है। शो की छुपी हुई लाइनों के ज़रिए एक मुलाक़ात तय होती है। उस ख़तरनाक मुलाक़ात से पहले, सितारा और कबीर के बीच वो पल आता है जो सात episode से आ रहा था, पहली बार दोनों एक दूसरे को चूमते हैं। अंत में अँधेरे से जो आदमी निकलता है, वो वैसा नहीं है जैसा सितारा ने सोचा था। वो अर्जुन है, मेहक का छुपा हुआ प्रेमी, घायल, और उसके हाथ में सबूत। वो मुझ तक पहले पहुँच गए।
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अँधेरा सबसे गहरा यहाँ है। अर्जुन सब बता देता है, उसने और मेहक ने सबूत ढूँढा था, वो सच सामने लाना चाहती थी, वर्धन के लोगों ने उसे मारकर गिरना बना दिया, और वो भाग गया। तभी वर्धन के लोग मिल पर पहुँच जाते हैं। कबीर सितारा को बचा लेता है, पर अर्जुन को वो खींचकर ले जाते हैं, चिल्लाते हुए कि असली recording स्टेशन के archive में छुपी है। अंत में सितारा वो archive खोलती है, और access log कहता है कि आज रात वो आख़िरी बार एक ही keycard से खुला था। कबीर मेहरा का।
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सबसे गहरा अँधेरा। ये यक़ीन करके कि कबीर ने धोखा दिया, सितारा उससे अलग हो जाती है, और दिल टूट जाता है। अकेली और शिकार बनी, उसका शो हमेशा के लिए बंद होने को है, और वर्धन उसे एक शैतानी सौदा देता है, चुप रहो और जियो, या मेहक की तरह ग़ायब हो जाओ। अंत में चिंटू की मदद से सितारा को पता चलता है कि कबीर का keycard clone किया गया था, स्टेशन के पुराने मैनेजर मिश्रा जी ने, जो वर्धन का आदमी है। कबीर ने धोखा नहीं दिया, उसे फँसाया गया और उठा लिया गया, और मिश्रा जी अभी archive मिटाने जा रहा है।
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चरमोत्कर्ष, on air। सितारा और चिंटू मिश्रा जी को आख़िरी recording मिटाने से रोक लेते हैं। फिर सितारा एक जुआ खेलती है, वो रात के दो बजे live होती है, वर्धन को फ़ोन पर उलझाए रखती है, और पूरे सोते शहर के सामने मेहक की आख़िरी कॉल और क़त्ल का सबूत बजा देती है। शहर वो गवाह बन जाता है जो मेहक को कभी नहीं मिला। वर्धन के लोग signal काटने आते हैं, स्टूडियो में हाथापाई होती है। अंत में प्रसारण शहर तक पहुँचता है, रात फट पड़ती है, और स्टूडियो के अँधेरे में एक गोली चलती है।
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सेहर का हिसाब। गोली जानलेवा नहीं थी, कबीर ने उसे सितारा के सामने आकर लिया। शहर की गूँज और उस क़ानून के सामने जो अब आँखें नहीं मूँद सकता था, वर्धन का साम्राज्य दरकने लगता है, और मेहक को आख़िरकार उसका नाम वापस मिलता है। अर्जुन ज़िंदा है, आज़ाद, और वो और नैना एक नरम अलविदा कहते हैं, आवाज़ का सपना असल के आगे झुक जाता है। नैना कबीर को चुनती है। जिस शहर ने सुना, उसी ने नाइट शो को बचा लिया। और जब on air की बत्ती सुबह में बदलती है, ठीक दो बजे एक नई डरी हुई आवाज़ फ़ोन करती है, और शो का मक़सद फिर से जन्म लेता है। कबीर, अब बहुत धीरे से, "सो मत जाना।" वो मुस्कुराती है।