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फिर वही फेरे

Hindi

फिर वही फेरे

Avni Oberoi द्वारा Avni Oberoi सत्यापित लेखक
15 अध्याय 22 बार पढ़ा गया

तनवी सक्सेना ये ज़िंदगी एक बार जी चुकी है। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट जो लखनऊ के रसूख़दार राणा ख़ानदान की बहू बनी, परिवार का घोटाला खुला तो सारा इल्ज़ाम उसी के सिर मढ़ दिया गया। बदनाम और अकेली, उसने आख़िरी साँस सलाखों के पीछे ली। फिर एक सुबह उसकी आँख खुलती है और शहनाई बज रही है, यही उसकी शादी का दिन है, तीन साल पीछे। उसे सब कुछ याद है। इस बार वो किसी की क़ुर्बानी का बकरा नहीं बनेगी। पर जिस पति को वो अपना दुश्मन समझती है, वो अरयन भी कुछ ऐसा जानता है जो उसे जानना नहीं चाहिए। दो अजनबी, एक राज़, और एक ख़ानदान जिसने उसकी शादी को ही जाल बना दिया था।

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