सेठ हरिवंश की मौत पर युवा विधवा पद्मिनी विरासत संभालती है। भाइयों की साजिश के खिलाफ रघुवीर बनता है तलवार। लेजर से जुनून तक भरोसा सबसे बड़ा दांव।
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सेठ हरिवंश की अचानक मौत के बाद वसीयत पढ़े जाने पर उनकी युवा विधवा पद्मिनी पूरे बाजार साम्राज्य की वारिस बन जाती है जबकि भाई प्रदीप और महेश खाली हाथ रह जाते हैं। भाइयों के गुस्से भरे सार्वजनिक वादों के बाद पद्मिनी डर के मारे आधी रात को रघुवीर को बुलाने को मजबूर हो जाती है।
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आधी रात को हवेली पहुंचे रघुवीर ने पद्मिनी को गुप्त लेजर दिखाकर प्रदीप और महेश की सालों पुरानी चोरी का खुलासा किया और उसके साथ खड़े होने की कसम खाई। रणनीति पर गर्म बहस के दौरान उनका दबा हुआ आकर्षण भड़क उठा और बात अचानक शारीरिक निकटता में बदल गई।
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जुनून की चरम सीमा पार करने के बाद पद्मिनी रघुवीर को व्यापार का पूरा ऑपरेशनल कंट्रोल सौंप देती है और महेश के मुख्य गोदाम पर पहला छापा लगाने की विस्तृत योजना बनाती है। लेकिन ठीक उसी समय प्रदीप कानूनी कागजात लेकर हवेली पहुंच जाता है और दावा करता है कि वसीयत दबाव में हस्ताक्षरित हुई थी।
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प्रदीप के कानूनी कागजातों को रघुवीर के संभाले पुराने दस्तावेजों से नकारते हुए वे महेश के मुख्य गोदाम पर छापा मारते हैं। पुरानी लेजर से महेश को बेनकाब कर विजय हासिल करने के बाद एड्रेनालिन और निकटता ऑफिस में उनके पहले स्पष्ट जुनूनी रात की ओर ले जाती है।
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रात की जुनूनी मुलाकात के बाद सुबह होते ही प्रदीप द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों से बैंक खातों को फ्रीज करवाने की खबर आती है। पद्मिनी और रघुवीर नई योजना बनाते हुए मुकाबले की तैयारी करते हैं लेकिन एक अधिकारी रघुवीर के भाइयों से छिपे पुराने संबंध का संकेत देकर उन्हें हैरान कर देता है।
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रघुवीर के पुराने संबंधों का राज खुलने के बाद पद्मिनी और रघुवीर रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचकर पुरानी लेजर के सबूतों और लगातार दबाव से खातों को अनफ्रीज करवा लेते हैं, प्रदीप महेश की साजिश नाकाम हो जाती है। वापसी की कार यात्रा में उनकी खुशी जुनून में बदल जाती है और सीट पर उग्र शारीरिक मेल शुरू हो जाता है।
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कार में जुनून भरी रात के बाद पद्मिनी पहले छोटे कोर्ट मामले में जीत हासिल करती है लेकिन प्रदीप और महेश विक्रेताओं पर दबाव बढ़ाकर उन्हें तोड़ने की कोशिश करते हैं। क्लिफहैंगर में महेश रघुवीर को भारी रिश्वत और साझेदारी का लालच देता है अगर वह पद्मिनी को धोखा दे।
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महेश की भारी रिश्वत और साझेदारी के लालच को रघुवीर ठुकरा देता है और वापस आकर पद्मिनी को सब कुछ बता देता है जिससे उनका भावनात्मक और शारीरिक बंधन और गहरा हो जाता है। लेकिन क्लिफहैंगर में पुरानी फाइलों में से एक पत्र निकलता है जो साबित करता है कि प्रदीप ने कभी रघुवीर को जासूसी के लिए संपर्क किया था।
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पुरानी फाइल से निकले पत्र की गलतफहमी को साफ करते हुए रघुवीर पद्मिनी को बताता है कि उसने प्रदीप का प्रस्ताव ठुकरा दिया था, फिर दोनों सप्लायर्स के पास जाकर भाइयों के सालों पुराने धोखे और चोरी के सबूत दिखाते हैं जिससे दो बड़े सप्लायर वापस लौट आते हैं और व्यापार उनके पक्ष में झुकने लगता है लेकिन क्लिफहैंगर में प्रदीप उनके सबसे वफादार मुनीम को अगवा कर लेता है।
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रघुवीर आधी रात को प्रदीप के छिपे ठिकाने पर छापा मारकर वफादार मुनीम रामदास को छुड़ाता है लेकिन ऑपरेशन के दौरान हिंसक संघर्ष हो जाता है जिसमें गोली चलती है और खून बहता है। बचाव के बाद हवेली लौटकर पद्मिनी के साथ उनके जुनून भरे पलों में वह प्यार का एहसास करती है लेकिन पूरा भरोसा करने का डर उसे सता जाता है।
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प्रदीप और महेश ने उच्च न्यायालय में भारी मुकदमा दायर कर वसीयत को जाली बताते हुए पद्मिनी की सारी विरासत पर सवाल खड़े कर दिए, जिससे बाजार साम्राज्य ठप होने का खतरा मंडरा गया। रघुवीर और पद्मिनी पुराने सबूतों के साथ लड़ाई की तैयारी करते हैं लेकिन जुनून भरे पलों के बीच रघुवीर को दस साल पुरानी गुप्त से जुड़ी मौत की धमकी मिल जाती है।
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धमकी वाले पत्र के बाद पद्मिनी और रघुवीर दिल्ली के टॉप वकीलों को हायर करके रात-रात भर लोहे जैसे सबूत जुटाते हैं, इस दौरान उनका शारीरिक जुनून और explicit होता जाता है जिसमें स्टडी रूम की मेज पर उग्र मेल मिलता है और कई रातें जुनून भरी तैयारी में गुजरती हैं। लेकिन उच्च न्यायालय की सुनवाई में एक सरप्राइज गवाह पेश होता है जो दावा करता है कि सेठ हरिवंश को पद्मिनी को अकेली वारिस बनाने के लिए मजबूर किया गया था, जिससे सब उलट जाता है।
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रघुवीर ने बैंक रिकॉर्ड और पुरानी फाइलें पेश कर झूठे गवाह को प्रदीप द्वारा भारी रिश्वत दिए जाने का प्रमाण दिया, जिससे कोर्ट ने गवाही खारिज कर मुकदमा पद्मिनी के पक्ष में कर दिया। लेकिन महेश ने बाजार के हर व्यापारी तक पद्मिनी और रघुवीर की explicit अफवाहें फैला दीं, जिससे उनकी जीत पर नया संकट आ खड़ा हुआ।
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बाजार में महेश द्वारा फैलाई गई explicit अफवाहों से विक्रेता दूरी बनाने लगते हैं और डील रद्द करने की खबरें आने लगती हैं, पद्मिनी और रघुवीर अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए बाजार पहुंचकर पुराने सबूत दिखाते हैं। भावनात्मक संघर्ष के बाद वे एक दूसरे की बाहों में सुलह करते हैं लेकिन ठीक उसी पल हवेली में घुसपैठिया टूट पड़ता है।
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रघुवीर ने हवेली में घुसे घुसपैठिए को पकड़कर बांध लिया और पूछताछ में वह कबूल करता है कि प्रदीप ने उसे सालों पहले कंपनी के अंदर जासूस बनाकर भेजा था। भावनात्मक और शारीरिक जुनून के बीच जब वह और राज खोलता है तो पद्मिनी का भरोसा हिल जाता है, जिससे उनके रिश्ते पर संकट के बादल मंडराने लगते हैं।
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रामलाल के चौंकाने वाले खुलासे के बाद पद्मिनी रघुवीर का सामना करती है और वह विस्तार से बताता है कि उसने जासूसी का प्रस्ताव तुरंत ठुकरा दिया था तथा शुरू से ही पद्मिनी की रक्षा कर रहा है। भावनात्मक उथल-पुथल और जुनूनी निकटता के बीच पद्मिनी का सदमा गहराता है और वह भ्रमित होकर अलग समय मांग लेती है जिससे रघुवीर पूरी तरह बेनकाब और खतरे में पड़ जाता है।
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रघुवीर के हवेली छोड़ने के बाद पद्मिनी अकेलेपन में पुरानी यादों और जुनून की लपटों से जूझती है लेकिन प्रदीप और महेश उनके अलगाव का फायदा उठाकर तीन प्रमुख बाजार ब्लॉकों पर कब्जा कर लेते हैं और बची हुई सारी तरल नकदी फ्रीज करवा देते हैं। भावनात्मक उथल-पुथल के बीच पद्मिनी को अचानक पता चलता है कि पुलिस रघुवीर को प्लांटेड चोरी के आरोप में गिरफ्तार करने वाली है।
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पद्मिनी पुलिस पहुंचकर रघुवीर को अकाट्य अलिबाई देकर बचाती है जिसमें वह साबित करती है कि आरोप वाली रात वह पूरी तरह उसके साथ था, इसके बाद उनका भावनात्मक पुनर्मिलन होता है और टूटा भरोसा पहले से कहीं मजबूत होकर लौटता है लेकिन यह खुशी उनके सबसे तीव्र जुनूनी रात में बदल जाती है जिसमें पद्मिनी खुद को पूरी तरह समर्पित कर देती है।
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पद्मिनी और रघुवीर अब पूरी तरह एक होकर काम करते हैं और एक छिपी शेल कंपनी के जरिए प्रदीप महेश के सारे कर्ज चुपके से खरीद लेते हैं जिससे भाइयों की कमर टूट जाती है लेकिन क्लिफहैंगर में प्रदीप को शेल कंपनी का राज पता चल जाता है और वह रघुवीर को व्यक्तिगत रूप से तबाह करने की कसम खाता है।
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पद्मिनी और रघुवीर मुख्य ऑफिस में कर्ज वापसी के कॉल्स शुरू करके जीत मना रहे थे कि अचानक प्रदीप-महेश के सड़क गुंडों ने हमला बोल दिया, स्टाफ घायल हुए और युद्ध खूनी मोड़ ले लिया, लेकिन क्लिफहैंगर में महेश ने पद्मिनी को मार डालने की सीधी धमकी दे दी अगर वे कर्ज के कॉल्स वापस न ले लें।
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महेश की मार डालने की धमकी के बाद पद्मिनी और रघुवीर हवेली की सुरक्षा कड़ी करते हैं, हरेक दस्तावेज को अंतिम उच्च न्यायालय सुनवाई के लिए तैयार करते हैं और जुनून भरे पलों में एक दूसरे से और मजबूत होते हैं लेकिन निर्णायक अदालती तारीख से ठीक पहले रात रघुवीर अचानक गायब हो जाता है।
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रघुवीर के अचानक गायब होने के बाद पद्मिनी अकेले उच्च न्यायालय पहुंचकर उसके द्वारा तैयार किए गए सबूतों और केस से लड़ती है, प्रदीप-महेश की सारी साजिशों को नकारते हुए जीत हासिल करती है लेकिन जीत की खुशी में उसे रघुवीर के लोकेशन का सुराग मिलता है और वह सुनसान गोदाम में उसे बुरी तरह पीटा हुआ लेकिन जिंदा पा लेती है।
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गोदाम से बुरी तरह पीटे गए रघुवीर को हवेली लाकर पद्मिनी उसकी देखभाल शुरू करती है, कोमल स्पर्श और भावनात्मक बातों से शुरू होकर उनकी रातें तीव्र शारीरिक जुनून में बदल जाती हैं जहां वह उसकी हर चोट सहलाती हुई खुद को समर्पित कर देती है, लेकिन प्रदीप और महेश हार स्वीकार न करते हुए सबसे बड़े गोदाम में आग लगा देते हैं।
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पद्मिनी और रघुवीर गोदाम में लगी भीषण आग को बुझाने के लिए दौड़ते हैं, अरसोनिस्ट्स को पकड़कर पूरे सबूतों समेत पुलिस को सौंपते हैं जिससे प्रदीप महेश की साजिश नाकाम हो जाती है, लेकिन राहत की इस पल में प्रदीप पद्मिनी का सामना करते हुए सेठ हरिवंश की मौत का असली कारण जानने का दावा कर देता है।
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प्रदीप के जहर वाले दावे को रघुवीर असली मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों से झूठ साबित कर देता है जिससे पुलिस दोनों भाइयों को आगजनी चोरी और साजिश के कई आरोपों में गिरफ्तार कर लेती है लेकिन विजय के उत्सव में रघुवीर के शादी के प्रस्ताव पर पद्मिनी हिचकिचा जाती है।
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समाज के भारी दबाव और अफवाहों को पार करते हुए पद्मिनी रघुवीर को बाजार की सभा में सार्वजनिक रूप से स्वीकार करती है और दोनों मिलकर साम्राज्य पर पूरा नियंत्रण ले लेते हैं, लेकिन ठीक उसी पल एक नया शक्तिशाली गुमनाम निवेशक भूली हुई 49 प्रतिशत हिस्सेदारी का दावा लेकर हवेली पहुंच जाता है।