Chapter 1 of 26 19 min read 18+
साजिश का जाल
हाल ही में 25 वर्षीय विधवा मेहर को ससुराल वाले संपत्ति बेचने और उसे घर से निकालने के लिए कागजात पर जबरन हस्ताक्षर कराने की साजिश रचते हैं जबकि विक्रम खुलकर अपने परिवार का विरोध करता है और मेहर के अधिकारों की रक्षा करता है। परिवार की मीटिंग के बाद निजी पल में मेहर के आंसू फूट पड़ते हैं और वो विक्रम की बाहों में समा जाती है जहां उनका लंबा आलिंगन एक वर्जित जागृति को जन्म देता है।
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