Chapter 4 of 26 10 min read 18+
अपराधबोध की छाया
किस के बाद गहरे अपराधबोध से मेहर और विक्रम एक दूसरे से बचने लगते हैं जबकि रंजीत मेहर के हस्ताक्षर की जालसाजी की योजना को तेज कर देता है। विक्रम पुराने बैंक रिकॉर्ड्स से सालों के फ्रॉड का प्रमाण खोज लेता है और मेहर को बताने दौड़ता है जहां उनका राहत भरा आलिंगन भूखे और जुनूनी किस में बदल जाता है।
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