Chapter 3 of 26 16 min read 18+
रिवाज का दबाव
सुबह के नाजुक पलों में पिछली रात की निषिद्ध स्मृति वैदेही को घेरती है जबकि आरव खुश होता जा रहा है। परिवार के बुजुर्गों के आने पर अभिमन्यु पर साली-विवाह का खुला दबाव बनता है आरव के भविष्य और परंपरा के नाम पर जिसे छिपकर सुनकर वैदेही को एहसास होता है कि जिजा के प्रति उसकी दबी आकर्षण कभी मरी ही नहीं थी और अब यह सब खुलकर सामने आने वाला है।
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