Chapter 24 of 25 15 min read 18+
माफी का पत्र और दौड़
सुबह उठकर गुलनाज आर्यवीर का हाथ लिखा पत्र पढ़ती है जिसमें वो उसकी गलतियों को माफ करते हुए कहता है कि वो उसे खो नहीं सकता, ये पढ़कर उसके अंदर तूफान उठता है और वो एयरपोर्ट की ओर दौड़ पड़ती है जहां आर्यवीर दोनों के लिए टिकट लेकर इंतजार कर रहा है।
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